बरमकेला। आज के दौर में जहां शादियां फिजूलखर्ची, दिखावे और दहेज की कुरीति से प्रभावित होती जा रही हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में आयोजित 3 जोड़ों के दहेज मुक्त आदर्श विवाह ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। बिना किसी दान-दहेज और अनावश्यक खर्च के अत्यंत सादगीपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए इन विवाहों ने यह संदेश दिया कि विवाह एक पवित्र संस्कार है, जिसे बिना दिखावे के भी गरिमा और सम्मान के साथ निभाया जा सकता है।
इस आदर्श विवाह में न बैंड-बाजा था, न घोड़ी, न डीजे का शोर और न ही लाखों रुपये के भव्य टेंट व सजावट। दोनों परिवारों ने झूठी शान और दिखावे से दूर रहकर आपसी सहमति और सादगी के साथ वैवाहिक बंधन को स्वीकार किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि वर पक्ष की ओर से किसी प्रकार की दहेज की मांग नहीं की गई और वधू पक्ष पर भी किसी तरह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।
इस पहल को समाज में व्याप्त दहेज प्रथा और अनावश्यक खर्च की मानसिकता के विरुद्ध एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह विश्वास मजबूत होता है कि यदि समाज सादगीपूर्ण विवाह पद्धति को अपनाए, तो बेटियों की शादी को लेकर परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।
संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों का कहना है कि उनकी दहेज मुक्त विवाह मुहिम सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है, जो समाज को सादगी, समानता और कुरीतियों से मुक्त जीवन की प्रेरणा देती है। यह पहल लोगों को दिखावे की संस्कृति से बाहर निकलकर सरल और संस्कारयुक्त विवाह अपनाने का संदेश दे रही है।

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