बरमकेला। जनपद पंचायत बरमकेला की सामान्य सभा की बहुप्रतीक्षित बैठक एक बार फिर कोरम के अभाव में स्थगित हो गई। इस घटनाक्रम ने न केवल जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती नाराजगी और राजनीतिक खींचतान भी खुलकर सामने आ गई है। विकास कार्यों और जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को निराशा हाथ लगी।
जानकारी के अनुसार, 25 सदस्यीय जनपद पंचायत में सामान्य सभा की बैठक के संचालन के लिए कम से कम 9 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक थी, लेकिन निर्धारित संख्या में सदस्य नहीं पहुंचे, जिसके कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी। इससे पंचायत के कई अहम प्रस्तावों और विकास कार्यों पर निर्णय नहीं हो सका।
बताया जा रहा है कि सामान्य सभा की बैठक पहले 24 जून 2026 को प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर 30 जून 2026 कर दिया गया। इस निर्णय को लेकर कांग्रेस समर्थित 10 जनपद सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए बैठक के बहिष्कार का ऐलान किया। उनका आरोप है कि बैठक की तिथि बदलने से पहले सदस्यों से कोई राय या सहमति नहीं ली गई।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सदस्यों के साथ-साथ भाजपा समर्थित कुछ जनपद सदस्य भी बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पाया। इसके चलते सामान्य सभा की बैठक स्थगित करनी पड़ी और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव अधर में लटक गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जनपद अध्यक्ष की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष का आरोप है कि संवाद और समन्वय की कमी के कारण जनप्रतिनिधियों में असंतोष बढ़ रहा है। यदि समय रहते सभी पक्षों के बीच सहमति बनाई जाती, तो बैठक स्थगित होने जैसी स्थिति से बचा जा सकता था।
राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। लोगों का कहना है कि पंचायत की सामान्य सभा केवल औपचारिक बैठक नहीं होती, बल्कि गांवों के विकास, विभिन्न शासकीय योजनाओं की समीक्षा और जनहित के मुद्दों पर निर्णय लेने का सबसे महत्वपूर्ण मंच होती है। बैठक नहीं होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
अब सभी की निगाहें अगली सामान्य सभा पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनपद प्रशासन और जनप्रतिनिधि आपसी मतभेद दूर कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सफल होते हैं या राजनीतिक खींचतान का असर आगे भी पंचायत की कार्यप्रणाली पर पड़ता रहेगा।



