सारंगढ़।
प्रशासनिक हलकों में इन दिनों अनुशासन और मर्यादा को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। नगर पंचायत सरिया के मंगल भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान कथित तौर पर मर्यादा की सीमाएं लांघने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) डॉ. वर्षा बंसल की अध्यक्षता में चल रही बैठक उस वक्त विवादों में आ गई, जब एक पंचायत सचिव के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि सचिव ने पद और गरिमा के विपरीत जाकर अशोभनीय कृत्य किया, जिससे बैठक में मौजूद अधिकारी सन्न रह गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जनपद पंचायत बरमकेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अजय पटेल ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी सचिव सहित कुल चार लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

सुलग रहे हैं सवाल-
शासकीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को सरिया तहसीलदार कार्यालय के पत्र के आधार पर विभिन्न पंचायतों के कामकाज की समीक्षा के लिए यह हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई थी। प्रशासनिक गलियारों में दबी जुबान से यह चर्चा जोरों पर है कि ग्राम पंचायत बोरिदा एवं तोरा के सचिव पूर्णानंद (पूर्णचंद) साहू ने बैठक के दौरान महिला एसडीएम के समक्ष कथित रूप से अमर्यादित व्यवहार किया।
हालांकि, प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक कारण बताओ नोटिस में किसी ‘विशिष्ट घटना’ का खुलकर ब्योरा नहीं दिया गया है, लेकिन नोटिस में सचिव के आचरण को ‘अनुचित’ और ‘अशोभनीय’ करार दिया गया है, जिस पर अनुविभागीय अधिकारी ने मौके पर ही कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। प्रशासन ने इसे शासकीय कार्य के प्रति गंभीरता की कमी और अनुशासनहीनता माना है।
कामचोरी पर भी बरसी गाज-
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, शासकीय बैठकों को हल्के में लेने वाले और अपनी मर्जी के मालिक बने तीन अन्य सचिवों पर भी गाज गिरी है। बैठक से बिना किसी ठोस कारण के गायब रहने वाले
संतोष कोसले (सचिव, ग्राम पंचायत मानिकपुर),रंजीत सिंह सिदार (सचिव, ग्राम पंचायत लुकापारा),
पंडित राम सिदार (सचिव, ग्राम पंचायत अमुंरा एवं बुदबुदा)
को भी कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। प्रशासन ने दोटूक शब्दों में कहा है कि इन सचिवों की गैर-मौजूदगी के कारण जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा बाधित हुई, जो उच्च अधिकारियों के आदेशों की सरेआम अवहेलना और अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है।
जनपद पंचायत द्वारा जारी नोटिस के तेवर बेहद सख्त और सख्त हिदायत वाले हैं। इसमें स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि निर्धारित दो दिनों के भीतर इन सभी संबंधित सचिवों ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष या संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया, तो इसे लापरवाही की पराकाष्ठा माना जाएगा। ऐसी स्थिति में प्रशासन सीधे उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए मामला उच्च कार्यालय को प्रेषित कर देगा। अब देखना यह है कि नोटिस की जद में आए ये सचिव अपनी सफाई में क्या दलीलें पेश करते हैं।
- सरिया समीक्षा बैठक में सचिव के ‘अशोभनीय कृत्य’ से हड़कंप..महिला एसडीएम के सामने मर्यादा लांघने का आरोप, सचिव को नोटिस!प्रशासनिक मर्यादा तार-तार!बरमकेला जनपद ने 48 घंटे में मांगा जवाब..बैठक से नदारद रहने वाले 3 अन्य पंचायत सचिवों की भी प्रशासनिक घेराबंदी.. - June 13, 2026
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