सारंगढ़। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरुण मालाकार ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि 17 अप्रैल की शाम देश की लोकसभा में एक “खतरनाक साजिश” को नाकाम कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच विशेष अधिवेशन बुलाकर नरेंद्र मोदी सरकार 131वें संशोधन विधेयक को पारित कराना चाहती थी, लेकिन समूचे विपक्ष की एकजुटता ने इस मंसूबे पर पानी फेर दिया।
मालाकार के अनुसार, यह विधेयक लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा था, जिसके तहत सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था। इसमें 815 सीटें राज्यों से और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों से निर्धारित की जानी थीं। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव न केवल जल्दबाजी में लाया गया बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ भी था।
उन्होंने याद दिलाया कि लगभग 25 वर्ष पहले अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में 2001 में पारित 84वें संशोधन के तहत यह स्पष्ट किया गया था कि परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर ही किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान सरकार उस रोक को हटाने का प्रयास कर रही थी।
मालाकार ने यह भी आरोप लगाया कि यह संशोधन 2023 में पारित महिला आरक्षण से जुड़े 106वें संशोधन के प्रावधानों को भी कमजोर करता है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि महिला आरक्षण नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर जल्दबाजी में परिसीमन करने की थी, जिसका उद्देश्य जनप्रतिनिधित्व बढ़ाना नहीं बल्कि पिछले लोकसभा चुनाव में बहुमत घटने के बाद भाजपा की सत्ता को सुरक्षित करना था।
अंत में उन्होंने कहा कि “यह लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश थी, जिसे विपक्ष की एकता ने विफल कर दिया। देश की जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।”

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