बिलाईगढ़। अपर सोनिया जलाशय परियोजना से प्रभावित किसान रमेशर उर्फ रामेश्वर को न्यायपूर्ण मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर चला लंबा और शांतिपूर्ण आंदोलन आखिरकार रंग लाया। दो महीने से अधिक समय तक चले धरना-प्रदर्शन, दो बार कार्यालय घेराव, अधिकारियों से कई दौर की चर्चा और हाल ही में शुरू हुई भूख हड़ताल के दबाव में प्रशासन को झुकना पड़ा।
आंदोलन के परिणामस्वरूप प्रशासन ने 20 दिनों के भीतर मुआवजा भुगतान करने का लिखित आश्वासन दिया है, जिससे आंदोलनकारियों और प्रभावित किसान के बीच संतोष की लहर देखी जा रही है।
इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनीष चेलक (प्रदेश सचिव, भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़) ने बताया कि संबंधित भूमि के सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही प्रशासन को सौंपे जा चुके थे, इसके बावजूद मुआवजा देने में लगातार देरी की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से किया गया, जिसने प्रशासन को निर्णय लेने के लिए मजबूर कर दिया। मनीष चेलक ने साफ चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर मुआवजा नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि संगठित और शांतिपूर्ण जनआंदोलन से प्रशासन को जवाबदेह बनाया जा सकता है। प्रभावित किसान को न्याय मिलने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


