अक्षय पुण्य का महापर्व: सारंगढ़ में गूंजा भगवान परशुराम जयंती का उल्लास, भव्य शोभायात्रा ने मोहा मन…

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सारंगढ़। पवित्र पर्व अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सारंगढ़ नगर में विप्र समाज द्वारा भगवान परशुराम जयंती अत्यंत श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाई गई। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व को सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए सभी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं। इसी पावन तिथि पर माता रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार धारण किया था। इस अवसर पर नगर के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
दिन के समय बड़े मठ परिसर में उपनयन संस्कार का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक संस्कार में समाज के अनेक परिवारों ने भाग लेकर अपनी परंपराओं का निर्वहन किया।
रात्रि में विप्र समाज द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे नगर को भक्ति और उत्साह के रंग में रंग दिया। यह शोभायात्रा बड़े मठ से प्रारंभ होकर छोटे मठ, नंदा चौक, जय स्तंभ चौक होते हुए नगर भ्रमण कर पुनः बड़े मठ पहुंची। यात्रा में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही, वहीं युवाओं का जोश और उत्साह भी देखने लायक था।
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण ‘गीतांजलि रथ’ रहा, जिसके माध्यम से धार्मिक संदेशों का प्रसारण किया गया। इसमें बताया गया कि अक्षय तृतीया को सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत का दिन माना जाता है। इसी दिन बद्रीनारायण, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुलते हैं तथा बांके बिहारी मंदिर में विशेष दर्शन का महत्व होता है।
‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है – जो कभी समाप्त न हो। मान्यता है कि इस दिन किया गया पूजा-पाठ, दान-पुण्य और निवेश जीवनभर शुभ फल प्रदान करता है।
शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष, युवक-युवतियां शामिल हुए और पूरे आयोजन को भव्यता प्रदान की। पूरा नगर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में सराबोर नजर आया।

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