सारंगढ़ में अवैध पत्थर को ‘वैध’ बनाने की मशीन बना केजड़ीवाल क्रशर…डीजीपीएस सर्वे हुआ तो खुलेगी पोल…क्रशर की लीज पर करोड़ों का ‘रॉयल्टी घोटाला’?
सारंगढ़ |
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में खनिज माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब बिना पत्थर निकाले ही करोड़ों की रॉयल्टी खपाने का खेल शुरू हो गया है। ताजा मामला मेसर्स केजड़ीवाल क्रशर (संचालक: श्रीमती सुशीला रतेरिया, गुड़ेली) का है, जहाँ खनिज विभाग द्वारा आवंटित लीज क्षेत्र में आज तक खनन का एक निशान तक नहीं मिला है, जबकि कागजों में यहाँ से करोड़ों रुपये के पत्थर का उत्खनन दिखाकर रॉयल्टी पर्चियां जारी कर दी गई हैं।
बिना उत्खनन के कैसे कटी रॉयल्टी?
मिली जानकारी के अनुसार, खसरा नंबर 364/1, 366/2, 365/1 समेत अन्य खसरों पर कुल 1.234 हेक्टेयर की लीज स्वीकृत है। मौके पर स्थिति यह है कि आवंटित भूमि पूरी तरह समतल और अछूती है। नियमानुसार, रॉयल्टी तभी जारी होती है जब लीज क्षेत्र से माल निकाला जाए। लेकिन यहाँ खेल उल्टा है किसी दूसरी अवैध खदान से पत्थर निकाला जा रहा है और उसे ‘वैध’ दिखाने के लिए केजड़ीवाल क्रशर की लीज वाली पर्चियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राजस्व को करोड़ों का चूना-
यह सीधे तौर पर शासन के राजस्व की चोरी और छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 का खुला उल्लंघन है। सूत्रों का दावा है कि इस खेल में विभाग के कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता। बिना भौतिक सत्यापन के लगातार रॉयल्टी पर्चियां जारी होना कई सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों की मांग: हो डीजीपीएस (DGPS) सर्वे-
स्थानीय ग्रामीणों ने इस फर्जीवाड़े के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ईमानदारी से इस क्षेत्र का DGPS सर्वे और भौतिक सत्यापन कराए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अवैध उत्खनन के कारण गांव की सड़कें और पर्यावरण पहले ही तबाह हो चुके हैं, और अब इस कागजी हेराफेरी से शासन को भी ठगा जा रहा है।
वर्जन का इंतजार-
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जिला खनिज अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने बैठक में होने का हवाला दिया। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि शिकायत उच्च स्तर तक पहुँच चुकी है और जल्द ही एक जांच दल मौके पर भेजा जा सकता है।
बड़ा सवाल-
क्या प्रशासन इस “अदृश्य खनन” के दोषियों पर कार्रवाई करेगा या रसूखदार संचालक के दबाव में फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी?


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