कुपोषण पर करारा प्रहार: सारंगढ़ NRC बना 190 बच्चों के लिए नई जिंदगी की राह!
सारंगढ़-बिलाईगढ़ | जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से जिला चिकित्सालय सारंगढ़ का पोषण एवं पुनर्वास केंद्र (NRC) अब कुपोषित बच्चों के लिए उम्मीद की मजबूत किरण बनकर उभरा है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे के कुशल मार्गदर्शन और सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल के नेतृत्व में अब तक 190 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर किया जा चुका है।
15 दिनों का विशेष उपचार, पोषण और देखभाल का पूरा पैकेज
जिला चिकित्सालय में संचालित 10 बिस्तरों वाले NRC में गंभीर कुपोषित बच्चों को उनकी माताओं के साथ 15 दिनों तक भर्ती कर समग्र उपचार प्रदान किया जाता है। इस दौरान बच्चों को:
विशेषज्ञ डॉक्टरों की सतत निगरानी में इलाज
आयु अनुसार संतुलित और मानक पोषण आहार
सभी आवश्यक दवाइयाँ पूर्णतः निशुल्क
माताओं को पोषण, स्वच्छता और देखभाल की विशेष प्रशिक्षण
यह समग्र व्यवस्था बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को नई दिशा देती है।
मध्यप्रदेश तक गूंजा NRC का भरोसा
सारंगढ़ NRC की उत्कृष्ट सेवाओं की चर्चा अब राज्य की सीमाओं को पार कर मध्यप्रदेश के रायसेन जिले तक पहुंच चुकी है। यहाँ तक कि पड़ोसी राज्य से भी परिजन अपने बच्चों को लेकर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
मध्यप्रदेश से आए एक परिजन ने भावुक होकर कहा—
“यहां का अपनापन, डॉक्टरों की लगन और सुविधाएं देखकर हम बेहद संतुष्ट हैं। हमारे बच्चे को यहां नई जिंदगी मिली है।”
नन्हीं आकृति बनी सफलता की मिसाल
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भारती पटेल और डॉ. अमित पटेल के मार्गदर्शन में NRC टीम—सरला कुर्रे (F.D.) एवं भुनेश्वरी (स्टाफ नर्स)—ने 10 माह की बच्ची आकृति चौहान का सफल उपचार किया।
गंभीर कुपोषण और एनीमिया से जूझ रही आकृति अब स्वस्थ होकर मुस्कुराने लगी है। यह उदाहरण NRC की प्रभावशीलता का जीवंत प्रमाण है।
ग्रामीण-शहरी हर वर्ग में बढ़ा भरोसा
NRC की सेवाओं से अब न सिर्फ शहर बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में भी जिला चिकित्सालय के प्रति विश्वास तेजी से बढ़ा है।
निरंतर मॉनिटरिंग, संवेदनशील व्यवहार और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं ने इसे कुपोषण के खिलाफ एक मजबूत हथियार बना दिया है।
कलेक्टर की सराहना और संकल्प
कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने NRC टीम की सराहना करते हुए कहा—
“कुपोषण मुक्त जिला बनाना हमारी प्राथमिकता है। NRC में मिल रही उत्कृष्ट सेवाओं के कारण अब सीमावर्ती राज्यों के लोग भी यहां आ रहे हैं। हमारा प्रयास है कि हर बच्चा स्वस्थ होकर घर लौटे।”
सिविल सर्जन की अपील: हर जरूरतमंद तक पहुंचे सुविधा
सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल ने आमजन से अपील करते हुए कहा—
“यदि आपके आसपास कोई बच्चा कुपोषण के लक्षणों से ग्रसित है, तो उसे तुरंत जिला चिकित्सालय लाएं। यहाँ इलाज, भोजन और दवाइयां पूरी तरह निशुल्क हैं। साथ ही 15 दिन भर्ती रहने पर शासन द्वारा ₹2250 की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, जो बच्चे की माता को डिस्चार्ज के बाद प्रदान की जाती है।”
निष्कर्ष: स्वस्थ बचपन की ओर मजबूत कदम
सारंगढ़ NRC आज सिर्फ एक स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि कुपोषण के खिलाफ एक जनआंदोलन बन चुका है। प्रशासन, डॉक्टरों और स्टाफ की मेहनत से सैकड़ों बच्चों को नया जीवन मिल रहा है और जिले का भविष्य स्वस्थ एवं सशक्त बन रहा है।

