सारंगढ़ में फ्लाई ऐश डंपिंग पर सियासी घमासान, विधायक उत्तरी जांगड़े के सवाल से घिरी सरकार…विधायक उत्तरी जांगड़े के सवाल पर सरकार ने कहा – किसी को नहीं दी गई अनुमति…
रायपुर/सारंगढ़।सारंगढ़ के कुटेला क्षेत्र के पुराने पत्थर खदानों में फ्लाई ऐश की कथित अवैध डंपिंग को लेकर अब सियासी माहौल गरमा गया है। यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा में उस समय प्रमुखता से उठा, जब सारंगढ़ की विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने प्रश्न क्रमांक 1646 के माध्यम से सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा।
विधायक उत्तरी जांगड़े ने विधानसभा में प्रश्न उठाते हुए पूछा कि सारंगढ़ के कुटेला क्षेत्र की पुरानी पत्थर खदानों में आखिर किसकी अनुमति से फ्लाई ऐश डंपिंग की जा रही है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जल स्रोतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों, ठेकेदारों तथा अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
इस पर वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कुटेला क्षेत्र की पुरानी खदानों में फ्लाई ऐश डंपिंग के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति प्रदान नहीं की गई है। इसलिए इस संबंध में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
सरकार के जवाब के बाद और गहराए सवाल
विधानसभा में सरकार के इस जवाब के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है। यदि पर्यावरण विभाग द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है, तो क्षेत्र में फ्लाई ऐश डंपिंग कैसे हो रही है। इससे प्रशासनिक लापरवाही अथवा अवैध गतिविधियों की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरे की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाई ऐश डंपिंग से आसपास के जल स्रोतों, खेतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर फ्लाई ऐश से उड़ने वाली धूल के कारण लोगों की आंखों, फेफड़ों और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि फ्लाई ऐश से भरे डंपरों के आवागमन के कारण कई जगह दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिनमें लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। वहीं सारंगढ़ के डिग्री कॉलेज के छात्र भी इस प्रदूषित वातावरण में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध डंपिंग में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद यह मामला केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक जवाबदेही का विषय भी बन गया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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