सारंगढ़ । बिलाईगढ़ जनपद की ग्रापं गगोरी में प्रशासन की लापरवाही अब सीधेसीधे खूनखराबे मेंतब्दील हो चुकी है। श्मशान जैसी संवेदनशील शा.भूमि पर खुलेआम अवैध कब्जा और ईंट निर्माण की शिकायत करना एक ग्रामीण को इतना महंगा पड़ गया कि – उसे और उसके बेटे को जान से मारने की नीयत से पीट दिया गया । यह घटना सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र पर सीधा तमाचा है। ग्रापं के सरपंच द्वारा श्मशान भूमि पर अवैध रूप से ईंट निर्माण कराया जा रहा था । इस की शिकायत पहले ही की जा चुकी थी, लेकिन प्रशासन की चुप्पी और ढिलाई ने दबंगों को खुली छूट दे दी।शिकायतकर्ता जब अधिकारियों को फोटो, ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा था, तभी सरपंच और उसके समर्थकों ने रास्ते में रोककर उस पर उसके पुत्र पर लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। हमला इतना बेरहम था कि – दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
सबसे शर्मनाक पहलू यह है की यह हमला अचानक नहीं बल्कि प्रशासन की अनदेखी से पैदा हुई दबंगई का नतीजा है। यदि शिकायत पर समय रहते कार्यवाही होती, तो आज एक परिवार खून से लथपथ गंभीर न होता । घटना के बाद पीड़ित ने सरसींवा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई है, जहां बीएनएस की गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ FIR से ही प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है ?

यह घटना यह साबित करती है कि – क्षेत्र में कानून का नहीं, बल्कि दबंगों का राज चल रहा है ? अब सवाल सिर्फ दोषियों की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही का भी है, जिन्होंने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। क्या श्मशान भूमि पर कब्जा प्रशासन की नजर में अपराध नहीं था ? या फिर कार्यवाही न करना ही मौन समर्थन माना जाए ? गगोरी की यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी है कि – अगर शिकायत करना ही जानलेवा बन जाए , तो फिर कानून और प्रशासन का मतलब क्या रह जाता है ? पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और जनता यह जानना चाहती है की दोषियों पर कब गिरेगी कार्यवाही की गाज ? कब टूटेगा प्रशासन की चुप्पी का ताला ?
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