सारंगढ़-बिलाईगढ़/ कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे के निर्देश पर कलेक्टर सभाकक्ष, जिले के सभी स्कूल, कालेज आश्रम, हॉस्टल, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, हॉस्पिटल, वृद्धाआश्रम में राष्ट्र भावना और सम्मान के साथ वन्दे मातरम् का सामूहिक गायन कर राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने की ख़ुशी जाहिर की। इस दौरान वन्दे मातरम् के संबंध में रंगोली, भाषण, सम्बोधन किया गया।

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का 150 वर्ष
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी। यह पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ था। बाद में बंकिम चंद्र चटर्जी ने इसे अपने अमर उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया जो 1882 में प्रकाशित हुआ था।
वन्दे मातरम का इतिहास
वंदे मातरम गीत की पुष्टि अरविंद द्वारा 16 अप्रैल 1907 को अंग्रेजी दैनिक वन्दे मातरम में लिखे गए एक अंश से होती है, जिसमें लिखा है कि बंकिम ने अपने प्रसिद्ध गीत की रचना 32 साल पहले की थी। पुस्तक के रूप में इसके प्रकाशन से पहले, आनंद मठ बंगाली मासिक पत्रिका बंगदर्शन में धारावाहिक रूप से प्रकाशित होता था, जिसके संस्थापक संपादक बंकिम चंद्र चटर्जी थे। 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने बर्लिन के स्टटगार्ट में भारत के बाहर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया। झंडे पर वंदे मातरम लिखा था।
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