कांकेर: प्रदेश में इन दिनों कथित धर्मांतरण और मतांतरण को लेकर सियासत अपने चरम पर है। पिछले दिनों छत्तीगसढ़ की पुलिस ने दुर्ग रेलवे स्टेशन से दो नन और एक अन्य समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। दावा किया गया था कि, वे धर्मान्तरण की नियत से बस्तर के आदिवासी लड़के-लड़कियों को अन्य राज्य ले जा रहे है। हिंदूवादी संगठन बजरंग दल इस मामले में मुखरता से सामने आया था।

ननों की गिरफ्तारी पर सियासत
ननों की गिरफ्तारी की सूचना आम होते ही इसपर सियासी बयानबाजियां तेज हो गई। केरल से जनप्रतिनिधियों की टीम ने दुर्ग का दौरा किया और गिरफ्तार ननों से जेल में मुलाकात। इतना ही नहीं बल्कि संसद में भी इस मामले की गूँज दिखाई दी। सत्ताधारी दल भाजपा ने नेताओं ने जहां इस कार्रवाई को धर्मान्तरण के खिलाफ अभियान बताया था तो वही कांग्रेस ने राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा था कि वह अपनी नाकामियों के छिपाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है।
गांव में पास्टर्स की एंट्री पर प्रतिबंध
बहरहाल इन सबके बीच कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। बताया जा रहा है कि, यहां के दो गांव बांसला और जुनवानी के ग्रामीणों ने धर्मान्तरण और मतांतरण की आशंका के बीच ईसाई धर्म से जुड़े पास्टर्स और पादरियों के गांव में प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया है।
ग्रामीणों ने गाँव के बाहर बोर्ड लगाते हुए गांव में किसी भी ईसाई धर्म से जुड़े संतों के एंट्री को बैन कर दिया है। ग्रामीणों का दावा है कि धर्मान्तरण का सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासियों की परम्परा और संस्कृति पर पड़ रहा है।
- MP-CG की सहमति के बाद भी नहीं मिला एरियर, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 17 दिसंबर को प्रदेशव्यापी आंदोलन… - September 22, 2026
- छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में बंपर नियुक्तियों के अवसर, व्याख्याता के 854 पदों पर होगी भर्ती, जानिए पूरी खबर… - September 22, 2026
- छत्तीसगढ़ में 11वीं की छात्रा से दुष्कर्म, स्कूल के शिक्षक ने बनाया का हवस का शिकार, इस जिले से सामने आया गुरु-शिष्य के रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला… - September 22, 2026
