झारखंड के पलामू जिले में एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई हैं यहाँ एक मां ने अंधविश्वास के चलते अपनी डेढ़ वर्षीय बेटी की बलि दे दी। आर्थिक स्थिति सुधारने और तांत्रिक की बातों में फंसकर महिला ने बेटी का क़त्ल कर दिया, उसका सीना चीरकर दिल निकाला, फिर उसे पकाकर खुद खाया एवं तांत्रिक को भी प्रसाद के रूप में खिलाया।

घटना पलामू के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के खडारपर गांव की है। बलि के पश्चात् महिला निर्वस्त्र होकर बलि स्थल के पास नाचती रही। उसका मानना था कि इससे उसे सिद्धियां प्राप्त होंगी एवं घर की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। पुलिस ने आरोपी महिला गीता देवी को गिरफ्तार कर लिया है। तांत्रिक की पहचान बिहार के सासाराम निवासी के रूप में हुई है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। खडारपर गांव में लगभग 50 घर हैं, जिनमें अधिकांश दलित परिवार रहते हैं। गीता देवी (35) गांव में अपने पति अरुण राम की अनुपस्थिति में अपनी सास कौशल्या देवी एवं 4 बच्चों के साथ रहती थी। अरुण दिल्ली में काम करता है।
वही कुछ वक़्त पहले गांव में सासाराम का एक तांत्रिक आया, जो तंत्र विद्या के नाम पर लोगों को प्रभावित करता था। गीता देवी उसके प्रभाव में आ गई। घटना वाली रात गीता देवी अपनी सास से यह कहकर निकली कि वह बेटी को लेकर जपला बाजार जा रही है। देर रात तक घर न लौटने पर परिवार को चिंता हुई। रात में गीता देवी निर्वस्त्र हालत में घर पहुंची, जिससे परिवार को किसी अनहोनी की आशंका हुई। घर के लोगों ने पहले उसे कपड़े पहनाए तथा इसके बाद पूछताछ की। जब बच्ची के बारे में पूछा गया, तो गीता ने बेटी की बलि देने की बात कबूल की। गिरफ्तारी के पश्चात् गीता ने दावा किया कि यदि उसे पकड़ा नहीं जाता, तो अगले दिन वह अपनी बच्ची को जिंदा कर देती। यह घटना 12 नवंबर की रात की है। पुलिस अब मामले की विस्तृत तहकीकात की जा रही है तथा तांत्रिक की गिरफ्तारी का प्रयास जारी है।
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