सीएमएचओ डॉ. निराला ने भटगांव के स्कूल में स्वास्थ्य के प्रति बच्चों को जागरूक किया

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सारंगढ़ बिलाईगढ़/कलेक्टर श्री धर्मेश कुमार साहू के निर्देश पर जिले के विकासखंड बिलाईगढ़ के शासकीय कन्या पूर्व माद्यमिक शाला भटगांव में जिले एवं विकासखंड के चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के प्रांरभ में संस्था के प्रधान पाठक श्रीमती तुलसी बाई मनहरे ने चर्चा में उपस्थित जिला, तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटगांव के डॉक्टरों एवं कर्मियो का परिचय देते हुए स्वागत उद्बोधन दिया।जिला के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एफ.आर.निराला ने स्वास्थ्य जागरूकता के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि स्कूल के बच्चो में रक्त अल्पता मतलब खून की कमी होने की सर्वे रिपोर्ट है, जिसमे 6 माह से 5 वर्ष के बच्चे, 6 वर्ष के 10 वर्ष तक के बच्चो में खून की कमी और 10 वर्ष से 19 वर्ष तक के स्कूली छात्र छात्राओं में रक्त अल्पता देखी गई। रक्त अल्पता के कारण अनेक है जिसमे एक है भोज्य पदार्थ में आयरन की कमी। आयरन की कमी से शरीर की विकास बाधित होता है दिमाग में कमी, सोचने, सीखने की क्षमता कम होता है। याददाश्त में कमी, दिमाग एकाग्र नही हो पाने से स्कूल के बच्चो की रिजल्ट प्रभावित होता है। कुछ बच्चो में संतुलित आहार नही मिलने से भी विटामिन की कमी से बीमारियां होता है। इस कारण संतुलित आहार पर जोर दिया गया। कुछ बच्चो में सिकलसेल नामक बीमारी होता है। ये आनुवांशिक बीमारी है जो माता पिता से बच्चो में ट्रांसफर होता है। इस कारण शासन के आदेशानुसार 0 से 40 वर्ष तक के सभी लोगो की सिकल सेल की जांच अभियान की जा रही है, जिसमे आगे चल कर इनकी उपचार की प्रबंधन हो सकी वही दूसरी ओर शादी के समय काउंसलिंग कर सिकलसेल की बीमारी को पीढ़ी दर पीढ़ी होने से बचाया जा सकता है। शादी के समय कुंडली मिलान के अलावा सिकलसेल की जांच रिपोर्ट की भी मिलान करने की रिवाज को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। इसमें समाज प्रमुखों की भी भूमिका है। एनीमिया या रक्त अल्पता की कमी को संतुलित आहार ,पौष्टिक आहार फल सब्जी भाजी के उपयोग के अलावा आयरन गोली की पूरक आहार लेने से भी पूरा किया जा सकता है। 6 माह से 5 वर्ष के बच्चे को आयरन सिरप के रूप में दी जाती है। 6 वर्ष से 10 वर्ष तक के बच्चे को आयरन की गोली जो पिंक रंग की होती है, जबकि 10 वर्ष के उपर 19 वर्ष तक के बच्चो को ब्लू रंग की गोली दी जाती है। गोली को सप्ताह में एक बार मंगलवार को ही स्कूल में दी जाती है, जबकि आयरन सिरप की एक एक शीशी दवाई प्रत्येक बच्चो को शिशु संरक्षण माह जो अभी चल रही है, में दी जाती है जिसे 6 माह तक सप्ताह में 2 दिन मंगलवार और शुक्रवार को पिलाई जाती है। माता पिता को काउंसलिंग करके दी जाती है। छोटे बच्चे की दवाई को चेक करने की जिम्मेदारी मितानिन को दी गई, जबकि स्कूल के बच्चे को गोली खिलाने की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। आयरन गोली खाने से कोई साइड इफेक्ट नही होती बल्कि आयरन की कमी को पूरा करता है और बच्चे की फिजिकल और मेंटल ग्रोथ को बढ़ाता है। बच्चो के पलको से भी आग्रह है की स्कूलों में आयरन गोली की सेवन कराने में अच्छे वातारण बनाने में सहयोग करे। बच्चो में आयरन डिफिशिएंसी एनीमिया के लिए कृमि रोग भी एक कारण होता है। आंगनबाड़ी एवम स्कूल के बच्चो में कृमि रोग ज्यादा देखा जाता है। कृमि रोग होने के कारण भी बच्चो की विकास बाधित होता है क्योंकि कृमि बच्चे के पोशक तत्व को ग्रहण कर लेता है जिसके कारण बच्चे कमजोर हो जाते है उन्हे थकान होता है। दौड़ने,खेलने में सांस फूलने लगता है, चक्कर आता है सिर दर्द, पेट दर्द होता है आदि। कृमि रोग की खात्मा के लिए बच्चो को वर्ष में दो बार 10 अगस्त और 10 फरवरी को एनडीडी मनाते हुए कृमि नाशक गोली सभी बच्चो को दी जाती है। सर्वे में 61 प्रतिशत बालिकाओं में एवं 31 प्रतिशत बालकों में इस प्रकार औसत 46 प्रतिशत विद्यार्थियों में खून की कमी पाई गई है। यही नहीं गर्भवती महिला ,पोषक महिला अन्य महिलाओं को भी एनीमिया ज्यादा मात्रा है इसकी कमी को हम पोस्टिक आहार, खाना बनाने की सही विधि ,खाने में मौसमी फलों को शामिल करते हुए आयरन गोली का सेवन जरूर करे हमें अपनी भोजन में दूध को शामिल कर कैल्शियम की कमी को दूर कर सकते है तथा तीन पेड़ पपीता, मूंनगा तथा केला को घर में लगा कर सेवन करने से भी मदद मिलता है। महिलाओं को होने वाले मासिक धर्म भी एनीमिया का एक कारण है। इससे महिलाओं में एनीमिया की दर बढ़ जाती है। अतः महिलाओं को विशेष सतर्क व सावधान रहते हुए आयरन गोली और कैल्शियम की नियमित सेवन से मदद मिलती है। आयुष्मान भारत योजना में सभी स्वस्थ रहे इस कारण आयुष्मान आरोग्य मंदिर की स्थापना की गई है, जहां स्वास्थ्य अधिकारी नियमित रूप से योगा, मेडिटेशन ,कसरत ,खेलकूद के बारे में सिखाती है। लोग बीमार न हो। इसके लिए मदद करता है जबकि बीमारी हो जाने की स्थिति में सभी व्यक्तियों के लिए सरकार आयुष्मान कार्ड बना रहा है जो बीमार हो जाने की स्थिति में आयुष्मान कार्ड से फ्री में उपचार की व्यवस्था सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पताल जो इन्पेनल होती है वहा व्यवस्था रहता है। इस कारण बच्चे सहित सभी वयस्क लोगो की भी आयुष्मान कार्ड होनी चाहिए जिनका नही बना है वे अपनी निकट के चॉइस सेंटर में जाकर बनवा सकते है।इसके लिए आवश्यक दस्तावेज राशन कार्ड ,आधार कार्ड और मोबाइल नंबर की जरूरत होता है।तंबाखू गुटखा के नुकसान के बारे में बच्चो को बताया गया।वे इससे दूर रहे जबकि घर में उसके बड़े बुजुर्गो को भी इससे दूर रखने में बच्चे सहयोग करे। तम्बाकू के दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया कि इसमें 99 प्रतिशत ज़हरीली पदार्थ होता है, जिससे इसके सेवन से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। शैक्षणिक परिसरों को तम्बाकू मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाना है तथा युवाओं को तम्बाकू से दूर रहने का आह्वान किया। स्कूल में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के द्वारा आयुष्मान कार्ड बनवाने तथा सिकलिंग जांच की शिविर भी आयोजित था, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपना अपना आयुष्मान कार्ड बनवाया तथा सिकलिंग का जांच करवाया। इस अवसर पर बालवाड़ी ब्लॉक नोडल संजीव, शाला के प्रधान पाठक श्रीमती तुलसी मनहरे ,शिक्षिका श्रीमती पार्वती वैष्णव, शिक्षक फिरत राम कैवर्त,संकुल समन्वयक विजय साहू, जसवंत कुमार भास्कर, राम लाल चंद्रा, श्रीमती अनिता निराला, धनेश नारंग, श्रीमती हिमा नवरंग, श्रीमती बेबी सिदार, श्री शिव चौहान, श्रीमती नूतन ज्योति, स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य कर्मी श्रीमती लीला ध्रुव सुपरवाइजर, श्रीमती चंद्रकला जायसवाल एएनएम ,घनश्याम जायसवाल ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं प्रिंट मीडिया के पत्रकार बंधु राजू निराला, गुरुदेश्वर यादव (मोनू) एवं सैकड़ो की संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

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