पुरी पीठ के शंकराचार्य का बड़ा बयान: बोले- छत्तीसगढ़ में मतांतरण कराने में कांग्रेस सरकार की भूमिका, हिंदुओं को बना रहे अल्पसंख्यक…
पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती शुक्रवार को राजधानी पहुंचे। शंकराचार्य ने कहा कि हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाने की नेताओं की साजिश के चलते ही प्रदेश में मतांतरण हो रहा है।
अन्य प्रदेशों से मुसलमानों को यहां बसाने में नेता ही अहम भूमिका निभा रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकार की गलतियों के कारण ही उसकी हार हुई। कांग्रेस से पहले डा. रमन सिंह के कार्यकाल में भी मतांतरण करके हिंदुओं को ईसाई बनाने को बढ़ावा दिया गया।
सवर्ण-असवर्ण के नाम पर राजनीति
शंकराचार्य ने कहा कि नेता अपने स्वार्थ के चलते सवर्णों और असवर्णों में भेदभाव कर रहे हैं। पहले श्रमजीवी और बुद्धिजीवियों का वर्ग बनाकर भेदभाव किया। अब आदिवासी और बाहर से आने वालों के नाम पर राजनीति की जा रही है।
शंकराचार्य पद की है मर्यादा
शंकराचार्य ने कहा कि बरसों बाद श्रीराम मंदिर का निर्माण संपन्न हो रहा है, यह अच्छी बात है। लेकिन, वे 22 जनवरी को अयोध्या में होने जा रहे प्राणप्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होंगे। इसका कारण है कि इस साल चुनाव संपन्न होना है और प्राणप्रतिष्ठा का विधान शास्त्र सम्मन नहीं किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर का लोकार्पण करेंगे। प्रधानमंत्री मूर्ति को स्पर्श करेंगे और हम बाहर बैठकर तालियां बजाकर जयजयकार करेंगे। यह उचित नहीं है। शंकराचार्य पद की अपनी मर्यादा है। मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा शास्त्रोक्त विधान के अनुसार होनी चाहिए। ऐसे आयोजन में मैं नहीं जाऊंगा।
अयोध्या, काशी, मथुरा में मस्जिद
शंकराचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वर्तमान में खुश हैं। भविष्य में अयोध्या, काशी, मथुरा में मस्जिद का निर्माण होगा। यह संकेत है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में तीन मिनी पाकिस्तान बन जाएंगे।
प्रतिदिन पादुका पूजन, दीक्षा
अन्य प्रदेशों से मुसलमानों को यहां बसाने में नेता ही अहम भूमिका निभा रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकार की गलतियों के कारण ही उसकी हार हुई। कांग्रेस से पहले डा. रमन सिंह के कार्यकाल में भी मतांतरण करके हिंदुओं को ईसाई बनाने को बढ़ावा दिया गया।
सवर्ण-असवर्ण के नाम पर राजनीति
शंकराचार्य ने कहा कि नेता अपने स्वार्थ के चलते सवर्णों और असवर्णों में भेदभाव कर रहे हैं। पहले श्रमजीवी और बुद्धिजीवियों का वर्ग बनाकर भेदभाव किया। अब आदिवासी और बाहर से आने वालों के नाम पर राजनीति की जा रही है।
शंकराचार्य पद की है मर्यादा
शंकराचार्य ने कहा कि बरसों बाद श्रीराम मंदिर का निर्माण संपन्न हो रहा है, यह अच्छी बात है। लेकिन, वे 22 जनवरी को अयोध्या में होने जा रहे प्राणप्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होंगे। इसका कारण है कि इस साल चुनाव संपन्न होना है और प्राणप्रतिष्ठा का विधान शास्त्र सम्मन नहीं किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर का लोकार्पण करेंगे। प्रधानमंत्री मूर्ति को स्पर्श करेंगे और हम बाहर बैठकर तालियां बजाकर जयजयकार करेंगे। यह उचित नहीं है। शंकराचार्य पद की अपनी मर्यादा है। मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा शास्त्रोक्त विधान के अनुसार होनी चाहिए। ऐसे आयोजन में मैं नहीं जाऊंगा।
अयोध्या, काशी, मथुरा में मस्जिद
शंकराचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वर्तमान में खुश हैं। भविष्य में अयोध्या, काशी, मथुरा में मस्जिद का निर्माण होगा। यह संकेत है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में तीन मिनी पाकिस्तान बन जाएंगे।
प्रतिदिन पादुका पूजन, दीक्षा
शंकराचार्य के राजधानी आगमन पर श्रद्धालुओं ने रेलवे स्टेशन पर स्वागत किया। इसके पश्चात वे रावाभांठा स्थित श्रीसुदर्शन संस्थानम पहुंचे। अगले पांच दिनों तक प्रतिदिन दर्शन, दीक्षा, धर्म, राष्ट्र, आध्यात्म से संबंधित परिचर्चा और धार्मिक गोष्ठी का आयोजन किया गया है। सात जनवरी को हिंदू राष्ट्र धर्मसभा आयोजित की जाएगी। शंकराचार्य महाराज 10 जनवरी को कोलकाता के लिए प्रस्थान करेंगे।
शंकराचार्य के राजधानी आगमन पर श्रद्धालुओं ने रेलवे स्टेशन पर स्वागत किया। इसके पश्चात वे रावाभांठा स्थित श्रीसुदर्शन संस्थानम पहुंचे। अगले पांच दिनों तक प्रतिदिन दर्शन, दीक्षा, धर्म, राष्ट्र, आध्यात्म से संबंधित परिचर्चा और धार्मिक गोष्ठी का आयोजन किया गया है। सात जनवरी को हिंदू राष्ट्र धर्मसभा आयोजित की जाएगी। शंकराचार्य महाराज 10 जनवरी को कोलकाता के लिए प्रस्थान करेंगे।
