दुखद खबर: नही रहे “छोटे बाबा” युद्धवीर सिंह जूदेव…समर्थकों में टूटा दुख का पहाड़….
जगन्नाथ बैरागी
जशपुर। सियासत के गलियारे से बड़ी खबर आ रही है।खबर है कि चंद्रपुर से 2 बार विधायक रहे युद्दवीर सिंह जूदेव का आज सुबह 4 बजे आकस्मिक निधन हो गया है । वह काफी लंबे समय से बीमार थे और कुछ दिन पहले उन्हें ईलाज के लिए बैंलोर ले जाया गया था। रविबार को अचानक उनकी तबियत बिगड़ने लगी थी लेकिन शाम तक हालत में हल्का सुधार आने के बाद माना जा रहा था कि सब ठीक हो जाएगा लेकिन सोमबार की सुबह फिर से उनकी तबियत बिगड़ने लगी और सुबह 4 बजे उनका आकस्मिक निधन हो गया ।
पूर्व विधायक और भाजपा के युवा नेता युद्धवीर सिंह जूदेव के लीवर में संक्रमण की वजह से उपचार के लिए बैंगलोर ले ज़ाया गया था। जहां चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार जारी था। वही दरमियानी सुबह चार बजे के समीप लाइफ सप्पोर्ट सिस्टम में अपनी अंतिम साँसे ली।
युद्धवीर सिंह जूदेव का काफी दिनों से दिल्ली में इलाज चल रहा था, जहां उनकी हालत नहीं सुधरने उन्हें बैंगलोर शिफ्ट किया गया था। बताया जा रहा है कि बीती रात्रि उनकी हालत बहुत ही नासाज हो गई। जिसके बाद बंगलोर के लिए उन्हें रवाना किया गया। और चिकित्सकों ने अगले 24 घंटे को उनके लिए काफी अहम बताया था। वहीं वरिष्ठ और अनुभवी चिकित्सक लगातार उनके स्वास्थ्य का परीक्षण कर रहे थे। जिसके बाद आज अल सुबह राजनीतिक सूर्य के अस्त होने की दुःखद खबर निकल कर सामने आई।
युद्धवीर सिंह जूदेव के निधन की खबर से उनके समर्थक सदमे में हैं। युद्धवीर सिंह जूदेव बेबाक बोल के लिए विपक्ष में रहते हुए भी चर्चित रहे। वहीं सत्ता में कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए भी अपने राजनीतिक जीवन में विशिष्ट पहचान स्थापित की थी। बहुत ही कम उम्र में जिला पंचायत उपाध्यक्ष से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। जिसके बाद पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।
इसके बाद दो बार चंद्रपुर से भाजपा के टिकट पर बार विधायक रहे और जिसमें पहले विधायक कार्यकाल के दौरान संसदीय सचिव भी रहे। वही दूसरे विधायक काल मे बेवरेज कारपोरेशन के अध्यक्ष रहे। इसके बाद विपक्ष में रहते हुए भी दमदारी से हर एक मुद्दे पर वे बोलते रहे। अपने जीवन के अंतिम समय में अस्वस्थ रहते हुए भी उन्होंने भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों को लेकर मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से आवाज उठाते रहे। जीवन के आखिरी पड़ाव में उन्होंने बहुजन हिंदू परिषद की कमान संभाली और हिंदुत्व के लिए जहां बेबाकी से बोलते रहे वहीं भ्रष्टाचार तथा शासन-प्रशासन की अनियमितताओं को लेकर तथा राज्य की ज्वलन्त समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करते रहे, जिसके बाद अल्पायु में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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