जरूरतमंद व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दी जाने वाली स्वेच्छानुदान की राशि ब्लॉक अध्यक्ष की पत्नी, ड्राइवर और ड्राइवर को दिए?

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में चुनावी साल में एक बार फिर स्वेच्छानुदान की राशि के बंदरबांट का मामला सामने आया है. मनेंद्रगढ़ विधानसभा से कांग्रेस विधायक डॉ विनय जायसवाल के बाद अब भरतपुर-सोनहत विधानसभा से कांग्रेस विधायक गुलाब कमरो पर स्वेच्छानुदान राशि का बंदरबांट करने का आरोप लग रहा है.
आरोप है कि, जरूरतमंद व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दी जाने वाली स्वेच्छानुदान की राशि विधायक गुलाब कमरो ने भरतपुर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रविप्रताप सिंह की पत्नी दुर्गा सिंह को डेढ़ लाख रुपए की राशि स्वेच्छानुदान से दी है.

इसके अलावा विधायक के अपने मीडिया प्रतिनिधि प्रेम सागर तिवारी को भी स्वेच्छानुदान की राशि 20 हजार रुपए देने के आरोप लग रहे हैं. इसके अलावा विधायक के अपने ड्राइवर जावेद को भी स्वेच्छानुदान राशि से 50 हजार रुपए देने का आरोप है. वहीं कहा जा रहा है कि विधायक के खास प्रदीप साहू की बेटी सोनाली साहू को भी एक लाख रुपए दिए है. विधायक ने अपने समर्थकों और कांग्रेस पदाधिकारियों के परिजनों को स्वेच्छानुदान से राशि देकर उपकृत किया है. इसका खुलासा मनोज साहू नाम के युवक ने आरटीआई लगाया, तब हुआ है.
बता दें कि, विधायक गुलाब कमरो ने 2018 के विधानसभा चुनाव में स्वेच्छानुदान की राशि के बंदरबांट को लेकर बड़ा मुद्दा बनाया था. पूर्व संसदीय सचिव चंपादेवी पावले के स्वेच्छानुदान राशि के बंदरबांट को लेकर गुलाब कमरो भरतपुर-सोनहत की जनता के बीच गए थे और स्वेच्छानुदान राशि के दुरुपयोग को जनता को बताया था. अब विधायक बनने के बाद खुद गुलाब कमरो ने स्वेच्छानुदान राशि का बंदरबांट कर दिया.
विधायक गुलाब कमरो द्वारा स्वेच्छानुदान राशि के बंदरबांट को लेकर जिला पंचायत सदस्य रविशंकर सिंह ने सवाल उठाए है और कहा है कि स्वेच्छानुदान राशि कांग्रेस पदाधिकारियों को देकर गुलाब कमरो ने यह साबित कर दिया है कि वो भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र की जनता के नहीं सिर्फ कांग्रेसियों के विधायक है. इससे पहले जब चंपादेवी पावले ने स्वेच्छानुदान की राशि बांटी थी, तो गुलाब कमरो ने पर्चा बंटवाया था और 2018 के चुनाव में स्वेच्छानुदान राशि को बड़ा मुद्दा बनाया था.
इस संबंध में विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि स्वेच्छानुदान की राशि का कोई बंदरबाट नहीं हुआ है. हमारे पास जो आवेदन आते है, उसे मुख्यमंत्री के पास भेजते है. मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है वो किसी को भी दे सकते है. हम विधायकों का जनसंपर्क मद से होता है, ये मद हमारा होता है. स्वेच्छानुदान मंत्रियों, मुख्यमंत्री का होता है. वो किसी को भी दे सकते है, उनका विशेष अधिकार है. हमारे पास आवेदन आता है, हम भेज देते हैं. राशि बंदरबाट करने का जो आरोप लगा रहे हैं उनके पास कोई मुद्दा नहीं है. उनका काम ही यही है।
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