छत्तीसगढ़: पुलिस और नक्सलियों की लड़ाई में पीस रहे हैं निर्दोष ग्रामीण! नक्सली बताकर ग्रामीण को पुलिस ने भेज दिया जेल, 9 महीने सजा काटने बाद हुआ खुलासा, अब HC ने दिया ये आदेश…..

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले चार दशकों से अंदरूनी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण पुलिस और नक्सलियों की लड़ाई में पीस रहे हैं. ग्रामीणों के लिए एक तरफ खाई है, तो दूसरी तरफ कुआं।
कभी नक्सली निर्दोष ग्रामीणों को पुलिस का मुखबिर बताकर उनकी हत्या कर देते हैं. कभी पुलिस नक्सल सहयोगी बताकर निर्दोष ग्रामीणों को गिरफ्तार कर जेल में डाल देती है.

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लंबे समय से ग्रामीण इन समस्याओ से जूझ रहे हैं. सुकमा जिले में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है. मामला सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित मीनपा गांव का है, जहां एक बेकसूर आदिवासी ग्रामीण को 9 महीने तक जेल में सजा काटनी पड़ी . निर्दोष ग्रामीण की रिहाई तब हुई जब असली नक्सली ने सरेंडर कर दिया. मामला उजागर होने के बाद पुलिस प्रशासन की जमकर किरकिरी भी हुई. वहीं इस मामले में हाईकोर्ट ने बिना अपराध के निर्दोष आदिवासी को जेल भेजने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश भी जारी किया है.

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कोर्ट ने जारी किया ये आदेश
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और रजनी दुबे की डिवीजन बेंच ने प्रार्थी को एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया है. वहीं निर्दोष आदिवासियों को रिहा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वकील बीचेम पोंदी ने बताया कि सर्चिंग पर निकले जवानों पर फायरिंग के एक पुराने मामले में नक्सलियों की गिरफ्तारी करने और स्थायी वारंट तामील कराने चिंतागुफा थाना की पुलिस पार्टी सुकमा जिले के तुलेड़ पंचायत के अंतर्गत मिनपा गांव पहुंची थी.

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नक्सली समझ ग्रामिण को उठा ले गई पुलिस

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इसी दौरान यहां रहने वाले पोडियाम भीमा जो खेती किसानी का काम करते हैं, पुलिस उनको नक्सली के हमनाम होने की वजह से उठा ले गई. इतना ही नहीं उन्हें नक्सली बताकर थाने में जमकर पिटाई भी की. उसके बाद वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. इसके बाद तीन मार्च 2022 को मूल नक्सली पोडियाम भीमा अपने अन्य साथियों के साथ दंतेवाड़ा कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया. इस दौरान गिरफ्तारी पत्रक लेकर सारे रिकॉर्ड खंगाले गए और तब जाकर यह पुष्टि हुई कि पुलिस ने बेकसूर भीमा को 9 महीने से जेल में डाल रखा है.

खुलासा होते ही हाईकोर्ट ने तुरंत बेकसूर आदिवासी को जेल से रिहा करने का आदेश दिया. वहीं अब कुछ महीने बाद इस मामले में कोर्ट के चीफ जस्टिस ने निर्दोष आदिवासी ग्रामीण को बिना अपराध के 9 महीने तक जेल में सजा काटने से हुए उसे आर्थिक नुकसान के लिए एक लाख क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया है. वकील बीचेम पोंदी ने कहा कि मेरे द्वारा हाईकोर्ट के वकील प्रवीण धुरंधर के माध्यम से याचिका लगाई गई थी. उक्त आदेश में ग्रामीण को क्षतिपूर्ति राशि एक लाख रुपये दिए जाने के आदेश के साथ कोर्ट ने ने दोषी पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।

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