छत्तीसगढ़ मे 1900 ऐसे स्कूल जहाँ शिक्षक की छुट्टी का मतलब स्कूल बंद…! आत्मानंद स्कूलों की चकाचौंध के बीच एजुकेशन सिस्टम का यह एक काला सच….

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राज्य के 48000 स्कूलों में तकरीबन 1900 स्कूल ऐसे हैं, जहां एकल शिक्षकीय व्यवस्था ने पढ़ाई प्रभावित कर रखी है। इनमें ज्यादातर दूर-दराज के स्कूल शामिल हैं। आत्मानंद स्कूलों की चकाचौंध के बीच एजुकेशन सिस्टम का यह एक काला सच है।
ऐसा आज नहीं, बरसों से हैं। इन स्कूलों के शिक्षक जरूरी काम से भी अनुपस्थित हुए तो स्कूल बंद। कुछ जगह ऐसी तस्वीर भी आ रही है कि जहां बच्चों को टीचर के बदले रसोइये या सफाई कर्मी पाठ पढ़ा रहे हैं। हरिभूमि ने बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर और गरियाबंद जिले के कई स्कूलों का मुआयना किया, तो यह बात सामने आई है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते कही रसोइये तो कहीं सफाई कर्मी बच्चों को अध्यापन करवा रहे हैं। यही नहीं, कही स्वयं बच्चे स्कूल भवन के ताला खोलकर पढाई कर वापस घर लौट रहे हैं। शिक्षा कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मैनपुर विकासखण्ड क्षेत्र में 45 शासकीय प्राथमिक शाला एवं 40 मिडिल स्कूल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है, और तो और एक स्कूल ऐसा भी है, जहां कोई भी शिक्षक नहीं है ।

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मैनपुर से महज 06 किलोमीटर दूर गोपालपुर प्राथमिक शाला में एक कमरे के भीतर एक शिक्षिका द्वारा पांच कक्षाओं के 48 छात्र छात्राओं को अध्यापन करवाते नजर आई। बताया जा रहा है कि यहां पदस्थ एक अन्य शिक्षक प्रमोशन में अन्यत्र जगह स्थानांतरण हो गया है। वहीं, प्राथमिक शाला इदागांव में 110 छात्र- छात्राओं पांच कक्षाओं को एक शिक्षक अध्यापन करवा रहे हैं, ऐसे में शिक्षक के साथ स्कूल के बड़े छात्र भी अपने से छोटे बच्चों को पढ़ाई करवाते दिखाई दिए। प्राथमिक शाला इदागांव उपरपारा में 84 छात्र छात्राओं को एक शिक्षक पढा रहे हैं। वही मिडिल स्कूल इदागांव में 109 छात्रों को एक शिक्षक पढाई करवा रहे हैं। लहपीपारा एक ऐसा प्राथमिक शाला जहां कोई भी शिक्षक नहीं है, यह शिक्षक विहीन शाला बताया गया है।

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एक शिक्षक के भरोसे तीन कक्षाएं

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विभागीय जानकारी के अनुसार मैनपुर में प्राथमिक शाला खालियामुंडा, कन्या आश्रम कालीमाटी, प्राथमिक शाला पथरी, डुमरघाट, खासरपानी, कोयबा, पायलीखण्ड, लाटीपारा, नवापारा, आमापारा, गौरवमुंड, ताराझर, तहसील मुख्यालय मैनपुर जयंतीनगर, दबनाई, बडेगोबरा, मीमाटीकरा, गाजीमुडा, भाटापानी, महुआनाला, कमार पा कुचेंगा, कोदोमाली, नगबेल, पोहेलपारा, जरहीडीह, कन्हारपारा समेत थोक में ऐसे स्कूल हैं, जहां एक ही शिक्षक के जिम्मे कई कक्षाएं हैं।

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सीडी व प्रोजेक्टर से पढ़ रहे बच्चे

बस्तर ब्लॉक सहायक खंड शिक्षा अधिकारी सुशील तिवारी ने बताया कि , जिस हाईस्कूल में व्याख्याता नही है वहां के बच्चों को सीडी दिया गया है, जिससे बच्चे सीडी से अपनी पढ़ाई कर सके। इसके लिए बड़े आमाबाल एवं केशरपाल हाईस्कूल में प्रोजेक्टर की सुविधा दी गई है।

इंग्लिश मीडियम की चकाचौंध के बीच एकल शिक्षकीय स्कूलों का काला सच भी

जगदलपुर के बड़े आमाबाल हाईस्कूल में रसायन के व्याख्याता का एक वर्ष पूर्व स्थानांतरण किया गया, उसके बाद उस विषय में एक भी व्याख्याता पदस्थ नहीं किया गया। साथ ही इसी ब्लॉक के केशरपाल हाईस्कूल में भौतिक के व्याख्याता का भी स्थानांतरण किया गया, पर उसके बदले कोई भी व्याख्याता नहीं पदस्थ किया। इसी स्कूल के अंग्रेजी एवं संस्कृत विषय के व्याख्याताओं को आत्मानंद स्कूल में भेजा गया, पर इसके बदले व्याख्याता नहीं दिया गया। दोनों स्कूल के रसायन, भौतिक, अंग्रेजी व संस्कृत बच्चों को अध्ययन में परेशानी हो रही है और स्कूल प्रबंधन ने ऐसे बच्चों को सीडी के प्रोजेक्टर से विषय के नोट करा रहे हैं।

उच्चाधिकारियों को भेजी है जानकारी

मैनपुर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर मिश्रा ने बताया कि, एक शिक्षकीय स्कूलों में जल्द शिक्षक की व्यवस्था की जाएगी और इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है।

संभाग में 1530 स्कूल एकल शिक्षकीय, कैसे पूरा हो कोर्स –

बिलासपुर। शिक्षकों की भर्ती कर स्कूली शिक्षा में गुणवता करने का दावा खोखला साबित हो रहा है। आलम यह है कि पिछले दो साल के भीतर स्कूलों में 10 हजार के करीब शिक्षकों की भर्ती की गई है। इसके बाद भी साढ़े चार हजार से अधिक स्कूल ऐसे है, जहां आज भी केवल एक ही शिक्षक पदस्थ हैं। इससे बेहतर तो शराब दुकानों में बेहतर व्यवस्था है। राज्य की हर सरकारी शराब दुकान में औसतन 5 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। यह स्थिति राज्य के दूरस्थ इलाकों में ही हो ऐसा नहीं है। बिलासपुर और सरगुजा संभाग की ही बात करें तो 1530 स्कूल एकल शिक्षकीय हैं तो 200 के करीब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है।

शिक्षा विभाग कई स्कूलों को पास के दूसरे स्कूलों से अटैच करके काम चला रहा है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के मुताबिक प्रायमरी स्कूलों में हर 30 बच्चों पर एक शिक्षक और मिडिल स्कूल में 35 छात्रों पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है। इस नियम का पालन लेकिन कहीं नहीं हो रहा है। इसलिए ही प्रदेश में शिक्षा के उत्थान को लेकर किये गए तमाम दावों के बाद भी स्कूलों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्राथमिक शाला से लेकर प्रायमरी स्कूल, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली है। जिसके चलते स्कूली बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इन सरकारी स्कूलों में प्रधान पाठक से लेकर व्याख्याता, सहायक शिक्षक और प्राचार्य तक के पद खाली हैं।]

नई भर्ती से भेजे जाएंगे शिक्षक

बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी डीके कौशिक ने बताया कि, बिलासपुर और आसपास शिक्षक विहीन स्कूल तो नहीं है। जिले में 94 स्कूल जरूर एकल शिक्षकीय है। व्यवस्था के तहत स्कूलों में अध्ययन-अध्यापन का काम किया जा रहा है। नई भर्तियों के बाद इन स्कूलों में और शिक्षक भेजे जाएंगे।

जिला एकल शिक्षकीय स्कूल

बिलासपुर 94

जीपीएम 69

मुंगेली 09

जांजगीर-चांपा 39

कोरबा 352

जशपुर 264

रायगढ़ 183

सरगुजा 178

सूरजपुर 292

मनचाही जगह पर करा लेते हैं पोस्टिंग

दरअसल शिक्षा विभाग द्वारा कई एकल शिक्षकीय शालाओं में शिक्षक की नई पदस्थापना तो की जाती है, लेकिन महीना दो महीना बाद संशोधित आदेश जारी कर शिक्षक मनचाही जगह पर पोस्टिंग करा लेते हैं। इसी तरह से नए भर्ती के अंतर्गत पदस्थापना में भी यही खेल चलता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने प्रदेश के शिक्षक विहीन 510 स्कूलों में एक-एक शिक्षक नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षक विहीन स्कूलों से शिक्षकों का तबादला करने वाली व्यवस्था शिक्षा विभाग ने ही की थी। आश्चर्य की बात है कि हजारों शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी अभी तक इ स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं भेजे कई।

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