ब्लैक होल से सीधे पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है एक अद्भुत ‘प्रकाश’ क्या है ये जानिए….

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ब्रह्मांड में ब्लैक होल से संबंधित कई रहस्यों पर से पर्दा उठना अभी भी बाकी है। लेकिन, खगोलविदों ने एक नए रहस्य का राज खोलने में जरूर कामयाबी पाई है। इसके मुताबिक ब्लैक होल कई बार आश्चर्यजनक प्रकाश का भी निर्माण करता है और मौजूदा केस में यह प्रकाश पृथ्वी की ओर मुखातिब हुआ है।

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इसकी गति लगभग प्रकाश की गति के बराबर है। इस शोध में अमेरिका के प्रतिष्ठित एमआईटी के शोधार्थी भी जुटे हुए थे। वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल से निकली इस ऊर्जा के बारे में अभी तक क्या कुछ जानकारी हासिल की है, आइए जानते हैं।

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ब्लैक होल से निकल कर एक अद्भुत प्रकाश सीधे धरती की दिशा में बढ़ा है। इसकी चमक की रफ्तार प्रकाश की गति के लगभग बराबर है। खगोलविदों ने काफी रिसर्च के बाद इसके स्रोत का पता लगाया है। इस अद्भुत प्रकाश के निर्माण की प्रक्रिया की कहानी अभी पूरी तरह से सुलझ नहीं पाई है, लेकिन वैज्ञानिकों ने अभी तक जो अध्ययन किया है, उससे ब्रह्मांड के एक और रहस्य को खोलने में मदद मिली है। वैज्ञानिक अपने रिसर्च पर अभी आगे और भी काम जारी रखेंगे।

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इसी साल पहले नासा, Caltech और कुछ और संस्थानों के शोधकर्ताओं ने आसमान में एक अद्भुत प्रकाश (extraordinary flash) देखा था। यह प्रकाश आसमान के उस हिस्से में नजर आया था, जहां एक रात पहले ऐसा कुछ भी नहीं दिखा था। आखिर वह प्रकाश क्या था, इसके बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए कई तरह के टेलीस्कोप लगा दिए गए। इसके जरिए एस्करे, अल्ट्रावॉयलेट, ऑप्टिकल और रेडियो हर तरह के और विभिन्न वेवलेंथ के सिंग्नल को पकड़ने का इंतजाम किया गया, ताकि हर तरह का डेटा इकट्ठा हो जाए। मकसद यह था कि इतनी अधिक मात्रा में प्रकाश आखिर आया कहां से ?

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अब अमेरिका के प्रतिष्ठित मेसाचुसेट्स इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एएमआईटी) के खगोलविदों ने यह पता लगा लिया है कि उस अद्भुत प्रकाश या तरंगों का स्रोत क्या हो सकता है ? एक नई स्टडी में इन खगोलविदों ने पाया है कि यह सिंग्नल (प्रकाश) एक बहुत ही ज्यादा द्रव्यवान वाले ब्लैक होल के सापेक्षकीय जेट (relativistic jet) से निकला था, जिसकी स्पीड प्रकाश की गति के करीब थी। वैज्ञानिकों ने इसका नाम AT 2022cmc दिया है।

AT 2022cmc की विशेषता ये है कि इसकी चमक अबतक पाई गई किसी भी टीडीई (tidal disruption event)से कहीं ज्यादा है। इसका स्रोत भी अबतक मिले टीडीई में सबसे दूर है, जो कि ब्रह्मांड में 850 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है। यह अब तक पाया गया चौथा डॉपलर-बूस्टेड टीडीई है। जबकि, ऑप्टिकल स्काई सर्वे का इस्तेमाल करके खोजा गया यह पहला टीडीई है। खगोलविदों का कहना है, ‘ब्लैक होल जेट सीधे पृथ्वी की ओर बढ़ सकता है, जिससे दूसरी किसी भी दिशा में बढ़ने की तुलना में सिग्नल ज्यादा चमकदार प्रतीत हो सकता है। इसका प्रभाव डॉपलर बूस्टिंग और गुजरते हुए सायरन की बढ़ती हुई आवाज के समान है।’
इस शोध के को-ऑथर और एमआईटी के कावली इंस्टीट्यूट फॉर ऐस्ट्रोफजिक्स एंड स्पेस रिसर्च में पोस्ट डॉक्टरेट मैट्टियो लुचिनी ने कहा, ‘हम जानते हैं कि हर आकाशगंगा में एक बहुत विशाल द्रव्यमान वाला ब्लैक होल है, और वे ब्रह्मांड के पहले 10 लाख वर्षों में बहुत ही तेजी से बने थे। यह बताता है कि यह बहुत ही तेजी से निगलते हैं, लेकिन हम यह नहीं जानते कि यह निगलने की प्रक्रिया कैसे काम करती है। इसलिए टीडीई जैसे स्रोत यह जांचने के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं कि यह प्रक्रिया होती कैसे है। ‘

AT 2022cmc के बारे में पता चलने के बाद तत्काल खगोलविदों ने सिग्नल पर न्यूट्रॉन स्टार इंटेरियर कंपोजिशन एक्सप्लोरर (NICER)का इस्तेमाल करके उसपर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने पाया कि प्रकाश का स्रोत बहुत ज्यादा चमकदार था। यह बहुत ही शक्तिशाली गामा-किरणों के विस्फोट के बाद पैदा होने वाली चमक से भी ज्यादा शक्तिशाली था। रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक धीरज डीजे पाशम ने कहा कि ‘यह अद्भुत था।’ बाद में खगोलविदों ने एक्स-रे, रेडियो, ऑप्टिकल और यूवी टेलीस्कोप से जुटाए गए आंकड़ों को भी देखा और कुछ हफ्तों तक उनका विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि एक्स-रे बैंड में सिग्नल की चमक अत्यधिक थी।

लुचिनी के मुताबिक, ‘इस तरह की चमकीली घटनाओं में जो पदार्थों के जेट पैदा होते हैं, वे सीधे पृथ्वी की ओर दिखती हैं। लुचिनी ने सिग्नल के डेटा को एक मॉडल माना है, यह मानते हुए कि इस घटना में एक जेट शामिल है, जो सीधे पृथ्वी की ओर जाता है।’ इस शोध में लगे खगोलविदों के मुताबिक जेट की स्पीड प्रकाश की रफ्तार की तुलना में 99.99 फीसदी थी। और ऐसे जेट पैदा करने के लिए ब्लैक होल को बहतु ही ऐक्टिव फेज की जरूरत पड़ती है, जिसे पाशम ने ‘हाइपर-फीडिंग फ्रेंजी’ बताया है।

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