रायगढ़। बेईमान लोग किसी भी रिश्ते का विकास नहीं होने देते इसके विपरीत ईमानदारी किसी भी नियम और कानून को नहीं तोड़ती है, चाहे सिस्टम मे सभी तरफ भ्रस्टाचारियों का हुजूम हो लेकिन सच्चा व्यक्ति कभी अपनी सिद्धांतो से डिगता नहीं है, क्यूंकि वो नौकरी जॉइन करते अपनी उस शपथ को याद रखता है जो उसने लिया था कि अपने सर्विस काल मे अपने कर्तव्य को सच्ची निष्ठा और ईमानदारी से निभाएगा सारंगढ़ बिलाईगढ़ ने एक ऐसे ही एक कलेक्टर को अपनी आँखों से देखने का सौभाग्य प्राप्त किया था जिनका नाम है डी. राहुल वेंकट….
कभी रायगढ़ जिले का हिस्सा रहे सारंगढ़ मे भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या थी, अपने लाभ के लिए लोग जानबूझकर अपने कर्तव्यों से चोरी करते थे विभागीय अधिकारी भी सारंगढ़ में भ्रष्टाचार को मजबूरी का नाम देकर अपने कर्तव्यों से पलड़ा झाड़ने का काम करते थे, भ्रस्टाचारियों और अवैध कारोबारियों का हौसला इतना बुलंद हो गया था कि अपने राजनितिक आकाओं के बल पर जनता को मूर्ख समझ मनमानी करने से भी नही चूकते थे।

सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला बनते ही माफिया और भ्रस्टाचारियों कि खिल गई थी बांछे –
पहले ब्लॉक स्तर पर अवैध कारोबार और भ्रस्टाचार करने वाले सारंगढ़ जिला बनने के पश्चात इस आस मे जमे थे कि बड़े अफसरों भी को घुस कि बुंदी खिलाकर खुद रबड़ी और रसमलाई खाएंगे और जनता कि पैसे को मनमाने ढंग से लूटकर अपने आगामी 10 पीढ़ियों के लिए संचित कर सकेंगे! लेकिन खनन माफिया, भ्रस्ट ठेकेदार, बेईमान नेता, अवैध कारोबारी, अवैध तस्करो के मनसूबों पे पानी उस समय फिरने लगी जब एकलौते अधिकारी ने लाख कोशिशें और मिन्नते करने के पश्चात भी ना डरे, ना बिके ना झुके! इसलिए सारंगढ़ के गलियारों मे चर्चा है कि अपनी दाल ना गलते देख सब इकट्ठा होकर उस अधिकारी को ही यहाँ से हटाने का प्रयास किया। बहरहाल सच्चाई जो भी तबादला प्रसाशनिक स्तर पर हुआ हो या भ्रस्टाचारियों और माफियाओं कि कोशिश लेकिन जिन कलेक्टर ने सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला को मूर्तरूप देने अपना सर्वस्व त्याग किया उनका जिला अस्तित्व मे आने के मात्र 03 माह बाद ही तबादला किसी के गले नही उतर रही है।
कलेक्टोरेट मे भी फर्नीचर मामले का एक खुलासा –
सारंगढ़-बिलाईगढ़ अलग जिला बने कुछ महीने ही बीते हैं और वहां से भ्रष्टाचार की गूंज सुनाई देने लगी है। पूर्व कलेक्टर ने तबादले के पहले ऐसे ही एक मामले में भुगतान पर रोक लगा दी है। मामला फर्नीचर खरीदी से जुड़ा है।
नया जिला बनने के बाद अस्थाई कलेक्टोरेट बिल्डिंग में दफ्तरों के लिए फर्नीचर की जरूरत थी। शासन ने जो बजट आवंटित किया उससे खरीदी की जानी थी। पूर्व कलेक्टर डी राहुल वेंकट ने सीएसआईडीसी के पोर्टल से फर्म का चयन कर नियमानुसार क्रय करने का आदेश दिया था। अधिकारियों को पहले संबंधित फर्म में जाकर फर्नीचर सिलेक्ट करने का आदेश दिया गया। फर्म ने फर्नीचर सप्लाई कर दिया। जब कलेक्टर राहुल वेंकट ने सामग्री देखी तो कहा कि यह तो ऑर्डर से अलग है। जिस गुणवत्ता का फर्नीचर भेजने कहा गया था, यह उससे हल्की क्वालिटी का है। इसके बाद वे नाराज हुए और फर्म को पेमेंट करने से रोक दिया। करीब 42 लाख का फर्नीचर सप्लाई किया गया है जिसमें कई कुर्सियों में जंग लगी हुई मिली।
सर्टिफिकेट मिलेगा तभी भुगतान –
अब राहुल वेंकट का तबादला हो चुका है, लेकिन पेमेंट अटका हुआ है। फर्म संचालक ने कई बार भुगतान के लिए दबाव बनाना चाहा लेकिन जब तक अपर कलेक्टर से सभी फर्नीचर की गुणवत्ता को लेकर सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा, तब तक पीडब्ल्यूडी से भुगतान नहीं होगा। इसलिए मामला अटक गया है।
वर्तमान कलेक्टर डॉ फरिहा आलम हैँ भ्रस्टाचार के प्रबल विरोधी –
पूर्व कलेक्टर डी राहुल वेंकट के सारंगढ़ से हटने पर मानो भ्रस्टाचारियों के खुशी का आलम सातवें आसमान पर है! लेकिन उन्हे IAS और वर्तमान सारंगढ़ बिलाईगढ़ कलेक्टर फरिहा आलम के कार्यशैली का इल्म नही है, जो जांजगीर चांपा जिले मे पदस्त होने पर सभी भ्रस्टाचारियों की नींद हराम कर पंचायत को सुदृढ़ बनाने मे अनवरत लगी थीं, वही अधिकारी अब सारंगढ़ बिलाईगढ़ की कलेक्टर बन कर आई हैँ।
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