10% लाओ और जितनी मनचाहे माइनिंग विभाग से रॉयल्टी ले जाओ..! चंद्रहासिनी क्रेशर पर अधिकारी हो गए मेहरबान….बिना खदान असेसमेंट के दे रहे हैं रॉयल्टी पर्ची….
सारंगढ़: सारंगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत गुडे़ली खनिज संपदा से भरा हुआ है , लेकिन यहां स्थित चंद्रहासिनी क्रेशर उद्योग की मनमानी चरम सीमा पर है । अधिकारी भी इन पर मेहरबान नजर आ रहे हैं , क्योंकि यह खदान के नाम पर जीरो है उसके बाद भी इनको माइनिंग विभाग रॉयल्टी पर्ची दे रहा है । आखिर किसका है इन पर संरक्षण ? मोटे लिफाफे का है कमाल या फिर राजनीतिक रसूखदार होने पर बिना खदान का निरीक्षण किये इनको रॉयल्टी पर्ची दिया जा रहा है । आखिर अधिकारी क्यों नहीं दे रहे हैं ध्यान , खबर प्रकाशित होने के बाद भी अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है और अखबार को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं , ऐसा प्रतीत हो रहा है । वैसे तो जानकार की माने तो सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के पूर्व कलेक्टर द्वारा भी इस पर कार्यवाही करने के लिए अधिकारियों को सूचित कर दी गई थी । इसके बाद भी अधिकारी सर्दी के दिनों में ठंडी नजर आ रहे हैं । अब देखते हैं कि सारंगढ-बिलाईगढ़ जिले में नवपदस्थ कलेक्टर मैडम इन अधिकारियों को कितनी चार्जिंग करते हैं , यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा । वैसे तो खनिज अधिकारी योगेंद्र सिंह कार्यवाही करने में महारत हासिल कर बैठे हैं , क्योंकि इनका पोस्टिंग जहाँ भी हुआ है वहां ताबड़तोड़ कार्यवाही कर चुके हैं , लेकिन जैसे ही बात चंद्रहासिनी क्रेशर उद्योग की आती है तो अधिकारी इतना ठंडी क्यों पड़ जाते हैं । अधिकारियों को कहीं राजनीतिक दबाव तो नहीं या फिर कोई मोटा लिफाफा का खेला-लीला तो नहीं चल रहा है । अब तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि मां चंद्रहासिनी क्रेशर उद्योग को फिर से रॉयल्टी पर्ची जारी करेंगे या फिर इन पर जांच होगी ।

नाम मात्रा का है खदान मां चंद्रहासिनी क्रेशर उद्योग गुडे़ली में
अगर आपको खनिज विभाग से रॉयल्टी पर्ची निकालना हो तो पहले खनिज अधिकारी आकर खदान का निरीक्षण करते हैं , लेकिन यहां बैठे खनिज अधिकारी तो यहां झांकने तक ही नहीं आये हैं और वहां रॉयल्टी पर्ची जारी कर दिया जा रहा है । हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खनिज विभाग में 10% का खेला-लीला चल रहा है । अगर आपको रॉयल्टी पर्ची निकालना हो तो खनिज विभाग इतनी मेहरबान है कि आप वहां से जितना चाहे रॉयल्टी पर्ची ले लीजिए बस उनको 10% का कमीशन मिलना चाहिए , उसके बाद तो अधिकारी उसका खदान है या नहीं है , नियम से खदान संचालित है या नहीं है इससे उनको कोई मतलब नहीं है , केवल 10% दो और बेधड़क होकर रॉयल्टी पर्ची लेकर जाओ । ऐसा स्थिति रायगढ़ जिले के माइनिंग विभाग की हो चुकी है , आखिर किसका है संरक्षण ?

पर्यावरण विभाग के अधिकारीयो को सुध नही !
चंद्रहासिनी क्रेशर उद्योग गुडे़ली पर्यावरण विभाग के अधिकारी इस क्रेशर पर ध्यान नहीं देते हैं ।अगर आप चंद्रहासिनी क्रेशर उद्योग जाकर देखेंगे तो पता चल जाएगा कि कितनी बड़ी झोलझाल चल रही है । अगर आपको क्रेशर चलाना हो तो पर्यावरण विभाग के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है , लेकिन यहां अधिकारियों की सांठगांठ से पर्यावरण विभाग की नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए चंद्रहासिनी क्रेशर उद्योग संचालित हो रही है । क्रेशर की जाली है खुली और ना ही कोई पर्यावरण विभाग के नियमों का पालन , उसके बाद भी धडक्के के साथ क्रेशर संचालित हो रही है । पर्यावरण विभाग के अधिकारी जानकर भी अनजान बन रहे हैं । यह तो माइनिंग विभाग से भी गए गुजरे नजर आ रहे हैं , अधिकारी आखिर क्यों नहीं कर रहे हैं ऐसे क्रेशर ऊपर कार्यवाही ?
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