छत्तीसगढ़: स्कूल बाबू, शिक्षक और प्राचार्य मिलकर सरकारी खजाने में लगा दी 77,71,932 रुपए की सेंध, खबर पढ़कर आप भी हो जाएंगे हैरान….

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छत्तीसगढ़ के न्यायधानी में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक ऐसा हैरतअंगेज कारनामा हुआ है जिसे सुनकर लोग चकित हैं। दरअसल, बिलासपुर जिले के एक स्कूल बाबू, शिक्षक और प्राचार्य मिलकर सरकारी खजाने में 77,71,932 रुपए की सेंध लगा दी। अचरज की बात इसलिए कि यह घोटाला किसी कार्यालय में नहीं बल्कि एक मामूली से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हुआ है। और वह भी किसी खरीदी के नाम पर नहीं बल्कि एक कर्मचारी क नाम पर ट्रेजरी से 10 महीने में 22 बोगस बिल पास करा ट्र्रेजरी से 77 लाख झटक लिया गया।

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पूरा मामला बिल्हा ब्लॉक के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलतरा का ह। वहां पदस्थ सहायक ग्रेड 2 कैलाश चंद्र सूर्यवंशी, लिपिक निर्मला सिदार द्वारा व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे के बैंक खाते में ट्रेजरी के माध्यम से 77 लाख रुपए से अधिक की राशि ट्रांसफर करवा दिया। और हैरानी की बात यह है कि कर्मचारियों, अधिकारियों की दो-चार हजार के बिल पास करने में मीन मेख निकालने वाले ट्रेजरी के अधिकारी एक ही शिक्षक के खाते में 77 लाख रुपए ट्रांसफर करते रहे। जाहिर सी बात है, इसमें ट्रेजरी अधिकारियों की मिलीभगत रही होगी। तभी आंख मूंद लिए। बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है…गड़बड़ी करने वाले बाबू और शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह पूछने पर कि थाने में एफआईआर दर्ज कराया जाएगा, उन्होंने कहा कि वे शासन को रिपोर्ट सौपंगे, उसके बाद फिर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यह पूरा घोटाला जिस प्रभारी प्राचार्य के कार्यकाल में हुआ है, उस प्रभारी प्राचार्य प्यारे लाल मरावी की अब मृत्य हो चुकी है। वर्तमान प्राचार्य एन पी राठौर ने इस मामले की लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की थी। उसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने 3 सदस्यीय टीम बनाकर जब इस मामले की जांच करवाई तो पाया कि 2018 से 2019 के बीच बिना किसी आदेश के कभी अन्य पे, अन्य भत्ता, बेसिक पे बता कर महज 11 माह में 22 बार अलग-अलग बिल लगाकर पी एल कुर्रे के वेतन अकाउंट में यह राशि डाली गई है। यही नहीं कुछ माह पहले प्राचार्य की अनुपस्थिति में जब पी एल कुर्रे को प्रभार मिला तो उन्होंने स्वयं प्रभारी प्राचार्य रहते हुए भी यह कोशिश की जिसके बाद इस मामले का खुलासा हुआ इस मामले में कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने सहायक ग्रेड 2 कैलाश चंद्र सूर्यवंशी को पहले ही निलंबित कर दिया है वही व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे के ऊपर भी विभागीय कार्यवाही के लिए पत्र लिखा था ।

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ट्रेजरी की भूमिका भी संदिग्ध’

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इस पूरे मामले में ट्रेजरी कार्यालय की भूमिका भी अत्यंत संदिग्ध है। क्योंकि महज कुछ रुपयों का बिल में अंतर होने पर बिल लौटा देने वाले ट्रेजरी ने 11 महीने के अंदर 22 बार स्कूल से बिल उनके कार्यालय में जारी जमा होने के बाद भी एक भी बार आपत्ति नहीं लगाई और लगातार बिल पास करते रहे। व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे के खाते में शासकीय राशि पहुंचती रही। यही नहीं इस पूरे मामले का खुलासा भी ट्रेजरी ने नहीं बल्कि प्राचार्य ने किया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस पर कार्यवाही करते हुए मामले को सामने लाया। लेकिन न तो ट्रेजरी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और न ही उच्च कार्यालय को कोई शिकायत की। जानकार बताते हैं कि बिना ट्रेजरी के मिलीभगत के ऐसा संभव ही नहीं है कि किसी कर्मचारी को ट्रेजरी से अतिरिक्त राशि का भुगतान इस प्रकार हो जाए और गड़बड़ी पकड़ में न आए वह भी तब जब 11 माह के अंदर 22 बार अलग-अलग बिल लगे हैं और एक ही व्यक्ति को लाभ हुआ है और उसी के खाते में धनराशि गई है। इसका सीधा मतलब है कि इस पूरे मामले में ट्रेजरी के तत्कालीन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है ।

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घोटाले की पोल’

महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने शिकायत मिलते ही जांच करवाई, जिससे मामला परत दर परत घोटाले की पोल खुलती गई। बताते हैं, प्राचार्य एनपी राठौर ने मामले में संदेह होने पर जब इस मामले की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी डी के कौशिक को दी तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्राचार्यो की टीम बनाकर विद्यालय भेजा और प्राथमिक जांच करवाई। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर जहां सहायक ग्रेड 2 कैलाश चंद्र सूर्यवंशी को निलंबित किया वही व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे पर भी अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए राज्य कार्यालय को पत्र लिखा। लेकिन राज्य कार्यालय की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने प्राचार्य के पत्र के आधार पर स्कूल में ऑडिट भी करवाया और उसके बाद पूरे मामले की पोल खुली और धन राशि का पता चला। जिसके बाद अब उन्होंने जहां पुन्नीलाल कुर्रे को धनराशि शासकीय खाते में जमा कराने के लिए आदेश किया है। वही, इस पूरे मामले में दोषी सहायक ग्रेड 2 कैलाश चंद्र सूर्यवंशी और निर्मला सिदार को भी पक्ष रखने के लिए 3 दिन का समय दिया है।

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