बिग ब्रेकिंग: भारत के एक और पड़ोसी देश श्रीलंका बनने के कगार पर! पेट्रोल की कीमत मे 51% की बेतहाशा वृद्धि, सड़क पर उतरे लोग….
बांग्लादेश ने अपने इतिहास में सबसे ज्यादा तेल की कीमतों में वृद्धि की है और शेख हसीना सरकार ने ईंधन की कीमतों में 50 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है, जो बांग्लादेश की आजादी के बास से सबसे ज्यादा वृद्धि है।
बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा नई कीमतों की घोषणा के बाद शुक्रवार रात को फिलिंग स्टेशनों पर हजारों लोग उमड़ पड़े और हजारों लोग सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। लोग इसे अपनी जेब पर बहुत बड़ा झटका मान रहे हैं।
बांग्लादेश में तेल की कीमतों में लगी आग
सोशल मीडिया पर लोग अलग अलग वीडियो शेयर कर रहे हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों को पेट्रोल पंपों पर तेल भरवाने के लाइन में लगा देखा जा रहा है, वहीं कई पेट्रोल पंपों पर लोगों के बीच हाथापाई भी हुई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 51.7 प्रतिशत और डीजल के दाम 42.5 प्रतिशत बढ़ा दिए हैं, जिसके बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बढ़ाए हुए दाम को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सड़कों पर उतरे लोगों का कहना है कि, पेट्रोल और डीजल की कीमत में भारी बढ़ोतरी होने का सीधा असर लाखों लोगों की जिंदगी पर होगा और उनकी रोजी-रोटी बुरी तरह से प्रभावित होगी।
लोगों को लग रहा ‘श्रीलंका’ होने का डर
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन की कीमत में भारी इजाफा होने के बाद बांग्लादेश के ढाका के मालीबाग, मोहम्मदपुर, अगरगांव और अन्य क्षेत्रों में कई फिलिंग स्टेशनों में कामगाज को सस्पेंड कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन पेट्रोल पंपों पर कहा गया है, कि वो अब आधी रात के बाद जब नये दर लागू हो जाएंगे, उसके बाद पेट्रोल बिक्री शुरू कर देंगे, जिसको लेकर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बांग्लादेशी सरकार ने शुक्रवार रात ईंधन की कीमतों में शनिवार से 51.7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की। बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय ने नई कीमतों को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके मुताबिक राजधानी ढाका में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 135 बांग्लादेशी रुपया हो गया है, जो पिछली दर की तुलना में 51.7 प्रतिशत ज्यादा है।
सरकार ने क्या दी है दलील?
द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसी) ने एक बयान में फरवरी से जुलाई तक कम कीमतों पर ईंधन बेचकर 8,014.51 रुपये के नुकसान होने की बात कही है। बांग्लादेश सरकार ने कीमतों में भारी वृद्धि के पीछे यूक्रेन संकट को जिम्मेदार बताया है। आपको बता दें कि, रूस-यूक्रेन युद्ध और COVID-19 महामारी ने वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों को प्रभावित किया है। रूस वैश्विक बाजारों में तेल और गैस का सबसे बड़ा निर्यातक है, और रूस पर कई तरह के सख्त प्रतिबंध लगाए गये हैं, जिसकी वहज से तेल बाजार काफी प्रभावित हुआ है और दुनियाभर में तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। वहीं, विश्वबैंक का अनुमान है, कि इस साल विश्व की की जीडीपी ग्रोथ धीमी हो जाएगी और 2.9 प्रतिशत तक रह सकती है।
आर्थिक संकट के भंवर में फंसा बांग्लादेश
बांग्लादेश सेंट्रल बैंक की रिपोर्ट बताती है कि कैसे देश में आयात बढ़ा और निर्यात घटा है और इसका सीधा असर यहां के खजाने पर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई, 2021 से लेकर मई 2022 के बीच 81.5 अरब डॉलर का आयात किया गया है। यदि इसकी तुलना बीते साल से की जाए तो आयात में 39 फीसदी की बढ़त देखी गई है। इसका अर्थ है कि बांग्लादेश ने दूसरे देशों से सामान मंगवाने में अधिक डॉलर खर्च किए हैं और विदेशों को अपने सामान का निर्यात कम किया है जिससे देश को नुकसान हुआ है।
विदेशी मुद्रा भी हो रहा है कम
बांग्लादेश में विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के पास बस 5 महीने के खर्चे चलाने जितना ही विदेशी मुद्रा है। इसकी कई वजह बताई गई हैं। जैसे कि विदेशों में काम करने वाले बांग्लादेशियों की आय गिर रही है, आयात बढ़ रहा है और निर्यात घट रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर नजर डाली जाए तो पिछले साल जुलाई तक यह 45 अरब डॉलर था। 20 जुलाई, 2022 को यह घटकर 39 बिलियन डॉलर ही बचा है। 2 महीने पहले तक आंकड़ा 42 बिलियन डॉलर था।
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