रायगढ़: मेडिकल कॉलेज मे भटकने मजबूर मरीज! अस्पताल की व्यवस्था चरमराई,आखिर क्यों…
रायगढ़। नियमितीकरण की मांग को लेकर मेडिकल कालेज के संविदा डॉक्टर्स आज से बेमियादी हड़ताल पर चले गये हैं। इससे मेडिकल कालेज की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और मरीजों को भी इलाज के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां यह बताना जरूरी होगा कि रायगढ़ में स्व . लखीराम अग्रवाल मेडिकल कॉलज का संचालन तो शुरू हो गया है मगर अब तक सेटअप के अनुसार डॉक्टरों के सभी पदों पर भर्ती नहीं हो सकी है। इस स्थिति में मेडिकल कॉलेज में संविदा के जरिये डॉक्टरों की भर्ती की गई हैऔर उन्हीं से काम लिया जा रहा है।
संविदा चिकित्सकों का कहना है कि वर्ष 2014 से मेडिकल कॉलेज की स्थापना के दौरान से संविदा चिकित्सक ड्यूटी पर हैं, लेकिन अबतक उन्हें नियमित नहीं किया गया है। जिससे यहां पदस्थ 30 से अधिक संविदा चिकित्सक बेहद नाराज हैं। उन्हें रेगुलर चिकित्सकों की तरह सारे काम और सेवायें तो लिये जा रहे हैं मगर मगर नियमित डॉक्टर्स की तरह वेतन व सुविधायें प्रदान नहीं की जा रही हैं। इससे वे व्यथित होकर अपनी दशा और स्थिति की ओर शासन का ध्यान आकर्षण करने के लिए आंदोलनरत है। वे सिर्फ यही चाहते हैं कि आदर्श भर्ती नियम 2019 का पालन हो, जिसके तहत उन्हें नियमितीकरण किया जाए।
इसी एक सूत्रीय मांग को ही लेकर सोमवार से मेडिकल कॉलेज के सभी संविदा चिकित्सक लामबंद हो गए और धरना प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है । आज हड़ताल के पहले दिन संविदा चिकित्सकों ने स्व . लखीराम अग्रवाल की प्रतिमा के समक्ष बैठकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद किया। संविदा चिकित्सकों का कहना है कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में डाक्टर्स की डिफिसियन्सी है परंतु नियमितिकरण नहीं किया जा रहा है जबकि 2019 में आटोनॉमस का बिल छत्तीसगढ़ सरकार ने पास कर दिया है। उसके बाद भी लंबे अर्से से संविदा चिकित्सकों को नियमित नहीं किया गया है।
बढ़ सकती है मरीजों की परेशानी
प्रदर्शनकारी सविदा चिकित्सकों का कहना है कि यदि 15 दिन के भीतर नियमितिकरण की मांग नहीं मानी गई तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन पर जाने को बाध्य होंगे। अगर ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। उन्हें इलाज के लिए भटकना पड़ सकता है। हालांकि आज संविदा चिकित्सकों के हड़ताल के पहले ही दिन से मेडिकल कालेज की व्यवस्था चरमरा सी गई थी और मरीजों को इलाज कराने में दिक्कतें हो रही थीं
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