रायगढ़, कोरोनाकाल के चलते 18 महीने शाला बन्द रहा और इसी समय नयी शिक्षा नीति 2020 लागू हुआ। बच्चों में नयी सोंच एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु कार्ययोजना धरातल पर लाया गया पर कोरोनाकाल के लंबे अंतराल ने शिक्षा विभाग के मनसूबे पर पानी फेर दिया। हालांकि हमारे छत्तीसगढ़ में शिक्षा की निरंतरता को बनाये रखने का भरपूर प्रयास रहा पर यह काफी नही था। बच्चों में जो वांछित दक्षता हासिल होना चाहिए था वह समयानुरूप नही हो पाया। शाला 2022 में खुला तो वह भी शिक्षा सत्र के अंतिम पड़ाव में ऐसे परिस्थिति में बच्चों में अक्षर पहचान से लेकर कविता, कहानी को पढ़ पाना, स्वतंत्र लेख करवा पाना तथा गणितीय संख्या पहचान से लेकर संक्रियाओं को पूर्ण करवाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। राज्य स्तर पर इस चुनौती को पूर्ण करने हेतु 100 दिवसीय पठन अभियान की रूपरेखा बनायी गयी। इसमें बच्चों को स्थानीय स्तर के पठन सामग्री का उपयोग करते हुए समुदाय के सहयोग से विभिन्न प्रकार के मनोरंजक व ज्ञानवर्धक गतिविधियों को पूरे राज्य में करवाया गया। प्राथमिक शाला बालमगोड़ा में बच्चों को उनके पालकों व समुदाय के मदद से हमने पूरे 14 सप्ताह तक यह गतिविधि करवाया। जहाँ बच्चे बहुत कुछ भूल चुके थे वहाँ 100 दिवसीय पठन सीखने के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में काम आया। शाला के 80 प्रतिशत बच्चे कहानी स्तर व भाग की संक्रियाओं को प्राप्त कर लिए। प्राथमिक शाला से तीन बच्चों सूरज सिदार, यामिनी सिदार, अरमान सिदार का एकलव्य आवासीय विद्यालय में चयन क्रमश: 5 वें, 11वें और 12 वें स्थान पर रहा जो विद्यालय के लिए गौरवशाली पल रहा। जिला शिक्षा विभाग के पूरे टीम व संकुल प्राचार्य व समन्वयक के सफल मार्गदर्शन में हमने 100 दिवसीय पठन को पूरे उत्साह के साथ पूर्ण कराया जिसका परिणाम आज सामने है। तीनों बच्चों का आज संकुल प्राचार्य श्री जे.एल.नायक व समन्वयक श्री राजेन्द्र कुमार चौहान ने उत्साहवर्धन करते हुए पुरुस्कृत किया व बच्चों व शाला को बधाई दिया। शाला परिवार बालमगोड़ा की ओर से भी बच्चों के उज्जवल भविष्य की शुभकामना दी गयी।

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