सारंगढ़: फिल्मी नही रियल हीरो हैँ सारंगढ़ थाना प्रभारी विवेक पाटले…महाराष्ट्र के मजदूरों ने क्यों कहा देवमानुष.. पढ़िए मार्मिक कहानी, मजदूरों की जुबानी…
सारंगढ़: फिल्मी नही रियल हीरो हैँ सारंगढ़ थाना प्रभारी विवेक पाटले…महाराष्ट्र के मजदूरों ने क्यों कहा देवमानुष.. पढ़िए मार्मिक कहानी, मजदूरों की जुबानी…
जगन्नाथ बैरागी
रायगढ़। पुलिस वालो के बारे मे ऐसा माना जाता है कि राजनीतिक गलियारों की हुक्म उदूली ही उनकी नौकरी है। धारणा यह भी है कि वह सिर्फ नेताओं, अफसरों और धन्नासेठों की ही सुरक्षा और सेवा में जुटी रहती है। आम लोगों में उसकी दिलचस्पी कम ही है, लेकिन कुछ ऐसे वाकये भी हैं, जो पुलिस की इस परंपरागत छवि के उलट तस्वीर पेश करते हैं। ऐसा ही एक वाकया शनिवार की सुबह सारंगढ़ मे देखने को मिली जब कड़क थानेदार विवेक पाटले ने महाराष्ट्र के भूखे प्यासे पैदल हताश लोगों की ना सिर्फ दर्द भरी कहानी सुनी अपितु मानवता की एक ऐसी मिशाल पेश की की सारंगढ़ वर्षो तक याद रखेगा।
क्या है पुरा मामला –

शनिवार सुबह 2 युवक, 1 युवती एक् 14 वर्षीय बच्ची सरिया से पैदल चल कर सारंगढ़ चौकी तक पहुंचे चारों की हालत भूख और पैदल चलने की वजह से दयनीय जान पड़ती थी तभी किसी ने थाना प्रभारी विवेक पाटले को सूचना दी। सूचना प्राप्त होते ही स्वयं विवेक पाटले ने उनको थाने बुलाया, पहले प्यार से खाना खिलाने के पश्चात उनके आवागमन का कारण पूछा तो ज्ञात हुवा की चारों महाराष्ट्र के वासिम जिले के सुकली गाँव के बासीन्दे हैँ। उनके परिवार का कोई रिस्ते मे भाई छतीसगढ़ के सरिया मे बोरवेल मे काम करता था जिसने इनको काम के सिलसिले मे मजदूरी हेतु बुलाया था। जिस पर चारों जैसे तैसे पैसों की व्यवस्था करके सरिया तक पहुंचे थे। परन्तु जिस फोन से उनको सम्पर्क किया गया था वो नंबर बंद बता रहा था दो दिन तक अपने भाई की छान बिन कर थक हार कर चारो पैसे समाप्त होने पर भूखे प्यासे सरिया से पैदल सारंगढ़ तक आ गये थे। परन्तु इतना दूरी तय् करने पर सबकी हालत पस्त होकर टूट से गये थे। तभी थाना प्रभारी विवेक पाटले को जानकारी प्राप्त हुवी तो उन्होंने अपने कर्मचारियों से कहकर पहले तो नास्ता और भोजन का प्रबंध किया फिर उनकी आपबीती सुनकर अपने पैसों से बकायदा बस बिठाकर रायगढ़ रवाना किया, साथ ही महाराष्ट्र तक का ट्रेन टिकट की व्यवस्था कर रास्ते मे भी नास्ते – खाने हेतु खर्च दिये।

छतीसगढ़ के पुलिस ऐसे होते हैँ पता नही था, पुलिस नही देवमानुष हैँ यहाँ – अनिल पवार
अनिल पवार पिता उकंडी पवार उम्र 45 वर्ष ने कहा हमारे आँखों के सामने अंधेरा छा गया था महिला और बच्चियों की हालत देखकर रोना आ गया थम तभी साहब (विवेक पाटले) के रूप मे भगवान ने अपना दूत भेज के हमारी सहायता कराया। ऐसे पुलिस वाले के रहते कभी छतीसगढ़ मे किसी अनजान के साथ बुरा नही हो सकता। हम इस घटना को ताउम्र नही भूलेंगे तथा हम अपने गाँव और महाराष्ट्र मे भी सारंगढ़ और देवमानुषों की बात बताएंगे।
अनिल पवार के साथ उसका बेटा विलास पवार 24 वर्ष, रानी पवार पति विलास पवार 20 वर्ष तथा अनिल पवार की बेटी संध्या पवार 14 वर्ष भी मौजूद थी। चारों एक गी गाँव सुकली, पो. उपली पेन जिला वासिम महाराष्ट्र के निवासी हैँ। विवेक पाटले के साथ टीकाराम खटकर, वीरेंद्र ठाकुर् सहित अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद थे

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