समर वेकेशन में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला के बच्चों द्वारा कई गतिविधियों का किया जा रहा है क्रियान्वयन….
बिर्रा जांजगीर-चांपा -शिक्षा व्यवस्था का आधार स्तम्भ मूलतः प्राथमिक शाला होता है।कोरोना काल में हुए लर्निंग लाॅस की भरपाई के लिए गणित एवं भाषा के मूलभूत दक्षताओं को हासिल करने के उद्देश्य से सौ दिवसीय गणितीय एवं भाषाई कौशल विकास अभियान 14 सप्ताह का कार्यक्रम बहुत ही महत्वपूर्ण मूलभूत गणितीय एवं भाषाई दक्षताओं को प्राप्त करने के लिए यह कार्यक्रम बच्चों के लिए लाभदायक हो रहा है।
बीआरसीसी एच के बेहार ने कहा कि जनवरी 22 से अप्रेल 22 तक के चले इस अभियान में हर सप्ताह तीन स्तरों पहिली से दूसरी,तीसरी से पांचवी,छठवी से आठवी,सभी समूहों के लिए एक एक निश्चित अधिगम को निर्धारित कर तदुपरांत उस पर गतिविधियों के माध्यम से उस प्रतिफल को प्राप्त करना वास्तव में बहुत ही रोचकता पूर्ण रहा।बच्चो को रुचिपूर्ण तथा गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण देने के लिए यह अभियान एक पर्याय बना।चूँकि हर गतिविधि का वीडियो बनाकर शिक्षक उसे टेलीग्राम ग्रुप एफएलएन ग्रुप के साथ ही उसे स्कूल ग्रुप में भी भेजा जाता था।इससे दूसरे बच्चे व पालक व अन्य स्कूल के शिक्षक भी मोटिवेट होते थे। हर सप्ताह बेहतर गतिविधि आधारित वीडियो को चयन कर उसे शिक्षा विभाग के पढ़ई तुंहर द्वार के वेब पोर्टल में अपलोड किया जाता था तथा बच्चो एवं शिक्षको को प्रोत्साहित करने के लिए हमारे नायक के कालम में स्थान दिया जाता था।जो एक सम्मान से कम नही होता था।
2026 तक गणित एवं भाषा के मूलभूत दक्षताओं को प्राप्त करने के लिए इस तरह का कार्यक्रम बहुत ही मददगार होगा।इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल शिक्षको को बल्कि बच्चो को भी स्वतंत्र रूप से गतिविधि करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।शिक्षको के साथ साथ बच्चो ने भी स्वतंत्रतापूर्वक असीमित कल्पनाओं के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया।स्कूल के साथ ही साथ समुदाय के बीच जाकर व समुदाय को स्कूलो में बुलाकर एक दूसरे के अनुभव को साझा करने पर्याप्त अवसर मिला।सरल कार्यक्रम के तहत पिछड़े बच्चो को आगे बढ़ने का सहारा मिला। अँगना म शिक्षा कार्यक्रम के तहत माताओ को भी बच्चो के पढाई में शामिल कराया गया। सेल्फी विथ सक्सेस चैलेंज पद्वति सौ दिन सौ कहानी के माध्यम से बच्चो में पठन कौशल के साथ ही साथ उनके कल्पनाओं, सोचने की क्षमता,समस्या समाधान को बल मिला।
विकास खंड स्कूलो के कई शिक्षक प्रति सप्ताह एक निश्चित उद्देश्य लर्निंग आउटकम पर कार्य किये। सचमुच इस 100 दिवसीय गणितीय एवं भाषाई विकास अभियान का कार्यक्रम अत्यंत सराहनीय एवं गुणवत्ता पूर्ण रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बस्ताविहीन अभियान में बच्चों के द्वारा मिट्टी के बर्तनो का निर्माण बागवानी चित्रकारी लोककला लोकनृत्य आदि का कार्य समर वेकेशन में अपने शिक्षकों पालकों के सहयोग से बच्चे कर रहे हैं।विकास खण्ड बम्हनीडीह के धनुवारपारा सोठी माध्यमिक शाला सेमरिया प्राथमिक शाला अमोदी प्राथमिक शाला पचोरी माध्यमिक शाला मठपारा चांपा माध्यमिक शाला चोरियां प्राथमिक शाला आनंद पारा पोडीशंकर प्राथमिक शाला बिर्रा व अन्य शालाओं पर सौ दिन सौ कहानियों व अन्य गतिविधियों का क्रियान्वयन किया गया जा रहा है।उक्त जानकारी सहायक मिडिया प्रभारी डॉ उमेश दुबे ने दी।
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