नई दिल्ली/केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है।

दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।
केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है।
हलफनामे में कहा गया है, ‘‘भारत सरकार तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते।’’ केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।
- प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में बड़ी सौगात: NHM कर्मचारियों को 33 दिन के वेतन का ऐलान… - June 14, 2026
- श्रीमती उषा प्रियदर्शी वैष्णव बनीं राज्य महिला आयोग की नई अध्यक्षा..नारी सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को मिलेगा बल… - June 14, 2026
- डॉ. दीपक जायसवाल के नेतृत्व मे सारंगढ़ जिला अस्पताल की बदली तस्वीर…आधुनिक सुविधाओं से अब मरीजों को मिल रहा नया जीवन..करोड़ों की सरकारी संपत्ति को खुर्द-बुर्द होने से बचाया..सारंगढ़ मे ब्रेन हैमरेज, लकवा और दिल की बीमारियों का इलाज संभव.. - June 14, 2026

