सारंगढ़। जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में नई पहल की जा रही है। परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर अब किसान काले चावल की खेती के जरिए बेहतर आमदनी की उम्मीद कर रहे हैं। जिले में लगभग 200 किसान करीब 340 एकड़ भूमि पर ‘कुरो’ किस्म के काले चावल की खेती कर रहे हैं। खास बात यह है कि किसानों ने कुरो कंपनी के साथ अनुबंध किया है, जिसके तहत कंपनी उनकी उपज 25 हजार से 35 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदेगी। इस पहल से जिले में खेती की नई संभावनाएं विकसित होने के साथ किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने दानसरा पहुंचकर काले चावल की खेती का निरीक्षण किया और किसानों से सीधे संवाद कर उत्पादन, लागत, खेती की तकनीक तथा कंपनी के साथ हुए अनुबंध की जानकारी ली। इस दौरान किसान मनोज कुमार साहू ने बताया कि वे एक एकड़ भूमि में जैविक पद्धति से काले चावल की खेती कर रहे हैं। उन्हें करीब 15 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है। यदि निर्धारित दर पर पूरी उपज की खरीदी होती है तो एक एकड़ से लगभग 3.75 लाख से 5.25 लाख रुपये तक की सकल आमदनी संभावित है। हालांकि वास्तविक लाभ उत्पादन, गुणवत्ता, खरीदी की शर्तों और खेती की लागत पर निर्भर करेगा।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन में कुरो काले चावल की जैविक खेती का रकबा एक हजार हेक्टेयर से अधिक तक पहुंचने की संभावना है। वहीं कृषक उन्नति योजना के तहत पात्र किसानों को धान के स्थान पर अन्य फसल उत्पादन के लिए 15 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने हेतु पंजीयन कराया जा रहा है। इससे किसानों को वैकल्पिक खेती अपनाने के साथ शासन की योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने कृषि विभाग के अधिकारियों को काले चावल की खेती का क्षेत्र बढ़ाने और अधिक से अधिक किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से किसानों को आय के नए अवसर मिलेंगे और परंपरागत धान की खेती पर निर्भरता कम होगी।
दानसरा में निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने मुड़ियाडीह पहुंचकर पीवी और डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने खेतों में ऐप के माध्यम से किए जा रहे भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया समझी और शेष कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
इसी क्रम में कलेक्टर ने सारंगढ़ के पीएम श्री स्कूलों में स्थापित मिनी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं का भी निरीक्षण किया। कृषि विभाग द्वारा स्वॉयल हेल्थ कार्ड योजना के तहत जिले के तीन पीएम श्री स्कूलों में ये प्रयोगशालाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों और मृदा स्वास्थ्य की जांच का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा।
कलेक्टर ने विद्यार्थियों से चर्चा करते हुए उन्हें अपने खेतों की मिट्टी लाकर परीक्षण करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही कृषि विभाग को तीनों प्रयोगशालाओं की मशीनों का तत्काल कैलिब्रेशन कराने और कृषि संकाय के विद्यार्थियों को मिट्टी परीक्षण का उचित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान एडीएम डी.एस. राजपूत, उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, कृषि विभाग के अधिकारी, कुरो कंपनी के प्रतिनिधि प्रकाश जोशी सहित क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे। जिले में काले चावल की खेती का बढ़ता रकबा किसानों के लिए वैकल्पिक कृषि और बेहतर आमदनी की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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