क्या हो अगर किसी दिन मंदिर में पूजा करने के बाद आपको अचानक पता चले कि वहां स्वयं देवी मौजूद हैं? छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित मां खुड़िया रानी मंदिर से जुड़ी एक ऐसी ही रहस्यमयी कहानी स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित है.
मान्यता है कि यहां एक बैगा (आदिवासी पुजारी) ने देवी को गुफा के अंदर भोजन करते देख लिया था. इसके बाद माता ने ऐसा आदेश दिया कि पूजा करने का तरीका ही बदल गया.
पुजारी ने गुफा में ऐसा क्या देख लिया कि माता हो गईं नाराज?
स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक दिन पूजा समाप्त करने के बाद बैगा (आदिवासी पुजारी) गुफा से बाहर निकल गए. कुछ दूर पहुंचने पर उन्हें याद आया कि उनका कुछ सामान अंदर ही छूट गया है. वह उसे लेने के लिए दोबारा गुफा में पहुंचे.
बताया जाता है कि अंदर जाते समय उन्हें किसी के भोजन करने की आवाज सुनाई दी. कहा जाता है कि बैगा (आदिवासी पुजारी) धीरे-धीरे आगे बढ़े, तो सामने मां खुड़िया रानी को भोजन करते हुए देखा.
गुस्साई माता पुजारी से क्या बोली
कहानी के अनुसार, बैगा (आदिवासी पुजारी) को अपने सामने देखकर माता क्रोधित हो गईं. माता ने बैगा से कहा- “तुम्हें हम पर भरोसा नहीं है, जो अपना सामान लेने के लिए तुरंत वापस आ गए. अब से मेरी पूजा गुफा के अंदर नहीं, बल्कि बाहर से की जाएगी.”
पहाड़ी के भीतर है मां खुड़िया रानी का पवित्र धाम
मां खुड़िया रानी मंदिर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के अंतर्गत छिछली गांव में स्थित है. यह स्थान बगीचा से करीब 17 किलोमीटर दूर बताया जाता है.
इस मंदिर की खासियत यह है कि माता का धाम पहाड़ी के भीतर एक गुफा में स्थित है. गुफा तक पहुंचने के लिए एक संकरे रास्ते से गुजरना पड़ता है. अंदर काफी अंधेरा रहता है और प्राकृतिक जलधारा भी बहती है. इसलिए बिना पर्याप्त रोशनी के भीतर जाना संभव नहीं है.
यह स्थान पहाड़ी कोरवा जनजाति की कुलदेवी मां खुड़िया रानी का पवित्र धाम माना जाता है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन करने और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करने पहुंचते हैं.
नदी में सोने की नथ वाली मछली दिखने की क्या है मान्यता?
है कि नदी में सोने की नथ पहने एक विशाल मछली दिखाई देती है. कुछ लोग इसे मां खुड़िया रानी का रूप मानते हैं.
गुफा के भीतर से साल भर ठंडी जलधारा बहने की बात भी इस स्थान को खास बनाती है. यहां की डोकरी नदी से जुड़ा एक सुंदर जलप्रपात भी प्राकृतिक आकर्षण का केंद्र है. स्थानीय विवरणों में इस जलधारा का संबंध डोड़की नदी से बताया जाता है, जो इब नदी (छत्तीसगढ़ और ओडिशा में बहती है) की सहायक नदी है.
नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
मां खुड़िया रानी मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष आस्था देखने को मिलती है. इस अवसर पर यहां मेला लगने की परंपरा है. श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं.
गुफा की रहस्यमयी कहानी, पहाड़ी के भीतर स्थित मंदिर, बहती जलधारा और जनजातीय परंपराएं इस स्थान को खास पहचान देती हैं. मां खुड़िया रानी का यह धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि जशपुर की स्थानीय संस्कृति और लोकविश्वासों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल भी है.
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