सारंगढ़। धरती आबा-जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन के लिए ग्रामसभाओं को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में जिले में चयनित एक ग्रामसभा के लिए तकनीकी सहयोगी संस्था, सामाजिक संस्था अथवा स्थानीय संस्था का चयन किया जाना है। इसके लिए पात्र संस्थाओं से 8 अक्टूबर 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
अभियान के दिशा-निर्देशों के अनुसार चयनित संस्था द्वारा ग्रामसभा की क्षमता विकास, वनभूमि सर्वेक्षण, वन संसाधनों का मानचित्रण, लघु वनोपज प्रबंधन, जैव विविधता का मानचित्रण तथा सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति को तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना तैयार करने तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन में ग्रामसभा को सहयोग प्रदान किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
धरती आबा-जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना के प्रस्तुतीकरण एवं क्रियान्वयन के लिए 400 ग्रामसभाओं हेतु प्रति ग्रामसभा 15 लाख रुपये की दर से कुल 6000 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। तकनीकी सहयोगी संस्था के लिए आवश्यक है कि उसे वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत विभिन्न विभागीय योजनाओं के माध्यम से आजीविका संवर्धन एवं वन प्रबंधन में समन्वय के लिए कार्य करने का अनुभव हो।
संस्था का सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 अथवा राज्य सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत सोसायटी या सार्वजनिक न्यास के रूप में पंजीकृत होना आवश्यक है। इसके अलावा कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत संस्थाएं भी पात्र होंगी। संस्था का गत वर्ष तक का वित्तीय अंकेक्षण पूर्ण होना चाहिए तथा नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य है।
इसके अलावा संस्था द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के किसी भी जिले अथवा विकासखंड में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन में कम से कम तीन वर्षों से विभिन्न ग्रामसभाओं को सहयोग प्रदान किया जा रहा होना चाहिए। संबंधित ग्रामसभा द्वारा संस्था के नाम पर प्रस्ताव के माध्यम से लिखित अनुमोदन भी प्राप्त होना आवश्यक है। प्राप्त आवेदनों में संस्था की पात्रता एवं क्षमता का परीक्षण जिला स्तरीय निगरानी समिति के माध्यम से किया जाएगा तथा चयन प्रक्रिया 12 अक्टूबर 2026 तक पूर्ण की जाएगी।
जिले में कार्यरत पात्र संस्थाएं अपना आवेदन 8 अक्टूबर 2026 तक कार्यालयीन समय में कार्यालय कलेक्टर, आदिवासी विकास, सारंगढ़ में स्वयं उपस्थित होकर अथवा पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रस्तुत कर सकती हैं। अभियान के माध्यम से ग्रामसभाओं को वन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और आजीविका संवर्धन के लिए तकनीकी रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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