रायपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले में एनआईए की विशेष अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता रमेश खूंटे ने अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण कानूनी कदम बताते हुए कहा कि झीरम कांड का पूरा सच सामने आए बिना न्याय की लड़ाई अधूरी रहेगी।
रमेश खूंटे ने कहा कि झीरम घाटी में सिर्फ नक्सली हमला नहीं हुआ था, बल्कि कांग्रेस के तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने वाली इस भयावह घटना के पीछे कथित राजनीतिक षडयंत्र की आशंका भी लगातार उठती रही है। ऐसे में केवल उन आरोपियों को सजा मिलना, जो कानून की गिरफ्त में आए, पूरे घटनाक्रम का अंतिम सच नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि अगर घटना को अंजाम देने वालों की संख्या सैकड़ों में थी और बड़ी संख्या में आरोपी अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं, तो जांच का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित क्यों रहे? ताजा अदालत के फैसले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, जबकि अन्य कई आरोपी अभी भी वांछित बताए गए हैं।

‘किसके इशारे पर हुआ था इतना बड़ा राजनीतिक नरसंहार?’
खूंटे ने सवाल उठाया कि झीरम में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार सहित 29 लोगों की मौत ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया था। ऐसे में इस हमले के पीछे केवल हमलावर कौन थे, यह जानना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमले की पूरी साजिश, उसकी योजना और उसके पीछे के संभावित नेटवर्क की जांच भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि झीरम के शहीदों के परिवारों को सिर्फ फैसला नहीं, पूरा सच चाहिए।
दूसरी FIR की जांच पर भी उठे सवाल
रमेश खूंटे ने कहा कि वर्ष 2020 में शहीद उदय मुदलियार के पुत्र जितेंद्र मुदलियार की शिकायत पर दर्ज दूसरी एफआईआर में भी कथित आपराधिक षडयंत्र की जांच की मांग उठी थी। इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची और नवंबर 2023 में राज्य पुलिस को जांच की अनुमति का रास्ता साफ हुआ। इसके बावजूद इस मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होने की खबरें सामने आई हैं।
खूंटे ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट का रास्ता साफ हो चुका है, तो फिर जांच आगे क्यों नहीं बढ़ी? आखिर झीरम की साजिश की तह तक पहुंचने में इतनी देरी क्यों?
‘राजनीतिक षडयंत्र की जांच से किसे डर?’
कांग्रेस नेता ने कहा कि झीरम मामले में सुरक्षा चूक, नक्सली हमले और गिरफ्तार आरोपियों पर कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन इसके साथ-साथ उस कथित राजनीतिक षडयंत्र की भी जांच
होनी चाहिए, जिसकी चर्चा घटना के बाद से लगातार होती रही है।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष को अगर लगता है कि कोई राजनीतिक षडयंत्र नहीं था, तो निष्पक्ष जांच से पीछे हटने की बजाय जांच पूरी होने देनी चाहिए। दूध का दूध और पानी का पानी अपने आप सामने आ जाएगा।
खूंटे ने कहा कि कांग्रेस किसी निर्दोष को कटघरे में खड़ा करने की मांग नहीं कर रही, बल्कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के सामने लाने की मांग कर रही है।
‘झीरम सिर्फ इतिहास नहीं, छत्तीसगढ़ की आत्मा का घाव है’
रमेश खूंटे ने कहा कि झीरम घाटी छत्तीसगढ़ की राजनीति का ऐसा काला अध्याय है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। 13 साल बाद अदालत के फैसले से न्याय की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम जरूर आगे बढ़ा है, लेकिन शहीदों के परिवारों और प्रदेश की जनता के मन में उठ रहे तमाम सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है।
उन्होंने कहा, “झीरम के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हमले में शामिल हर दोषी, साजिशकर्ता और मददगार की पहचान होगी। किसी राजनीतिक दल को बचाने या किसी को फंसाने के लिए नहीं, बल्कि सच को सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
रमेश खूंटे ने दो टूक कहा कि झीरम की पूरी साजिश का सच सामने आने तक इस मामले को न्याय की अंतिम परिणति मानना शहीदों और उनके परिवारों के साथ न्याय नहीं होगा।
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