सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासकीय उचित मूल्य दुकान की महिला विक्रेता ने खाद्य निरीक्षक विद्यानंद पटेल के खिलाफ कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत देकर कथित अवैध वसूली, मानसिक प्रताड़ना और डिजिटल साक्ष्यों को हटाने के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत सामने आने के बाद खाद्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक मामला चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, डिजिटल साक्ष्यों की जांच तथा जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच होना अभी बाकी है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।

₹15 हजार के भुगतान का दावा, UPI स्क्रीनशॉट को बनाया साक्ष्य-
शिकायत के अनुसार, शासकीय उचित मूल्य दुकान आईडी 411003005 की विक्रेता सुश्री मोनिका बरेठ ने आरोप लगाया है कि उनसे कथित तौर पर ₹15,000 की राशि का भुगतान कराया गया।
शिकायतकर्ता ने इस भुगतान के समर्थन में UPI लेन-देन का स्क्रीनशॉट भी प्रस्तुत किए जाने का दावा किया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली और उचित मूल्य दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
अकेले मिलने का दबाव बनाने का आरोप-
महिला विक्रेता ने शिकायत में खाद्य निरीक्षक पर मानसिक रूप से परेशान करने के भी आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक, अधिकारी द्वारा बार-बार फोन कर अकेले में मिलने का दबाव बनाया जाता था।
फोन नहीं उठाने पर कथित तौर पर जांच के नाम पर दुकान पहुंचकर डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि लगातार दबाव और कथित प्रताड़ना के कारण वह और उसका परिवार मानसिक रूप से परेशान है।
चैट ने बढ़ाए सवाल-
मामले का सबसे गंभीर पहलू शिकायत में बताए गए कथित व्हाट्सएप संदेश को लेकर है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि लेन-देन से संबंधित स्क्रीनशॉट भेजे जाने के बाद व्हाट्सएप पर “Please delete those screenshots” संदेश भेजा गया।
यदि यह संदेश जांच में प्रमाणित होता है तो डिजिटल साक्ष्य को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े होंगे। इसलिए शिकायतकर्ता ने व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, UPI ट्रांजेक्शन आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
खाद्य निरीक्षक के कार्यप्रणाली पर जनता का सवाल?
शिकायतकर्ता और स्थानीय सूत्रों द्वारा खाद्य निरीक्षक के खिलाफ पूर्व में भी शिकायतें किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि पूर्व शिकायतों में कठोर कार्रवाई के बजाय तबादले जैसी कार्रवाई तक मामला सीमित रहा।
अब सारंगढ़ और बरमकेला क्षेत्र का प्रभार मिलने के बाद एक बार फिर कथित वसूली और दबाव की शिकायत सामने आने से विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, पूर्व शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना आवश्यक है।
बरमकेला में एक संचालक ने नाम ना छापने की शर्त पर मीडिया को बताया की अंचल मे उक्त खाद्य निरीक्षक के वसूली से त्रस्त है।
जांच से सामने आएगा सच-
बरमकेला क्षेत्र से भी खाद्य विभाग से जुड़ी कथित अवैध मांगों की चर्चाएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में महिला विक्रेता की शिकायत ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच करता है तो शिकायत में लगाए गए आरोपों के साथ-साथ यह भी स्पष्ट हो सकता है कि क्या किसी अन्य उचित मूल्य दुकान संचालक से भी इसी प्रकार की कथित मांग की गई थी।
संवेदनशील कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के सामने अब बड़ी चुनौती-
मामले में सबसे अहम भूमिका जिला प्रशासन की होगी। शिकायत में यदि UPI लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट जैसे डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच से आरोपों की वास्तविकता सामने लाई जा सकती है।
शिकायतकर्ता ने जांच के दौरान खुद और अपने परिवार की सुरक्षा की भी गुहार लगाई है।
जनता की मांग-
इस मामले को लेकर क्षेत्र की जनता की नजर अब जिला कलेक्टर और प्रदेश की भाजपा सरकार पर टिकी हुई है। जनता की मांग है कि महिला विक्रेता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को केवल शिकायत मानकर फाइलों में दबाने के बजाय निष्पक्ष, उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच कराई जाए।
जनता का कहना है कि UPI ट्रांजेक्शन, कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच होनी चाहिए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
साथ ही, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट की जाए, ताकि किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि कलेक्टर और भाजपा सरकार इस मामले में निष्पक्षता के साथ सख्त रुख अपनाएगी और जांच में दोष सिद्ध होने पर ऐसी कार्रवाई करेगी, जिससे शासकीय उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं को किसी भी प्रकार के कथित दबाव, प्रताड़ना या अवैध वसूली से संरक्षण मिल सके।
अब सवाल यही हैशिकायत पर होगी निष्पक्ष जांच या फिर मामला कार्रवाई के बजाय खानापूर्ति तक सीमित रहेगा?
खाद्य निरीक्षक विद्यानंद पटेल का पक्ष – महिला द्वारा लगाया आरोप निराधार है, मीडिया मेरी छवि खराब करने की कोशिश मे लगी है। मै अभी परिवारिक कार्यकर्म मे हु आके बात करता हु।


जिला खाद्य अधिकारी का कथन –
शिकयत प्राप्त हुई है विभाग निष्पक्ष जाँच करेगा, दोषी पाये जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई जरूर होगी।


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