भारत में प्राचीन काल से भगवान शिव के रहस्यमयी मंदिरों की कमी नहीं है. इन मंदिरों से जुड़ी मान्यताएं, चमत्कार और अनसुलझे रहस्य लोगों को हैरान कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे शिव मंदिर के बारे में सुना है, जिसके दर्शन सालभर नहीं, बल्कि केवल एक दिन के लिए ही होते हैं?

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर की यही अनोखी परंपरा इसे देश के सबसे रहस्यमयी और चर्चित मंदिरों में शामिल करती है. यह मंदिर वर्षभर बंद रहता है और केवल नागपंचमी के पावन अवसर पर 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोला जाता है. हजारों श्रद्धालु इस दुर्लभ अवसर का इंतजार पूरे साल करते हैं. अब सवाल है कि आखिर, इस मंदिर के केवल एक दिन खुलने की वजह क्या है? इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा क्या कहती है? आइए जानते हैं इस अद्भुत शिवधाम की रोचक कहानी-
महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर मंदिर
नागचंद्रेश्वर मंदिर, विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है. सामान्य दिनों में इस मंजिल पर श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं होता है. केवल नागपंचमी के दिन मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और भक्त भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर पाते हैं.
नागराज तक्षक ने की थी तपस्या
पौराणिक मान्यता के अनुसार, नागराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और यहीं निवास करने का वरदान दिया. तभी से यह स्थान नागराज तक्षक और भगवान शिव की कृपा का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि, नागपंचमी के दिन यहां दर्शन और पूजा करने से कालसर्प दोष, सर्प भय तथा नाग दोष से मुक्ति मिलने की प्रार्थना की जाती है.
अनोखी है शिव-पार्वती की प्रतिमा
नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित दुर्लभ प्रतिमा है. इसमें भगवान शिव और माता पार्वती नागराज तक्षक के फण पर विराजमान दिखाई देते हैं. बता दें कि, ऐसी प्रतिमा भारत के अन्य मंदिरों में बहुत कम देखने को मिलती है. यही कारण है कि यह मंदिर कला, धर्म और इतिहास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
साल में सिर्फ एक दिन ही क्यों खुलता है मंदिर?
मंदिर वर्षभर बंद रहने और केवल नागपंचमी पर खुलने के पीछे अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. माना जाता है कि, नागराज तक्षक को इसी दिन विशेष पूजा का अधिकार प्राप्त है और इस दिन भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है. इसी परंपरा के सम्मान में मंदिर के कपाट केवल नागपंचमी पर खोले जाते हैं. मंदिर प्रशासन इस परंपरा का पालन सदियों से करता आ रहा है.
लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़
नागपंचमी के अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं. दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं और प्रशासन विशेष व्यवस्था करता है, ताकि श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें. इस दिन महाकाल मंदिर परिसर का आध्यात्मिक वातावरण भक्तों की आस्था को और भी गहरा कर देता है.
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