आंध्रप्रदेश के कर्नूल जिले में एक बहुत ही पुराना मंदिर है, जिसे यागंती उमा महेश्वर मंदिर कहते हैं. यहां का एक किस्सा ऐसा है जो अच्छे अच्छे लोगों का दिमाग घुमा देता है. इस मंदिर में पत्थर की एक नंदी बाबा की मूर्ति है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका साइज हर साल धीरे धीरे बड़ा होता जा रहा है.

वहां के लोकल लोग बताते हैं कि हर 20 साल में यह मूर्ति लगभग एक इंच तक बढ़ जाती है. अब इस अनोखे अजूबे को देखने के लिए दूर दूर से लोग यहां खिंचे चले आते हैं.
जब वैज्ञानिकों की टीम जांच करने पहुंची
जब नंदी बाबा का साइज बढ़ने की खबर चारों तरफ आग की तरह फैली, तो सरकार की पुरातत्व विभाग वाली टीम भी हैरान रह गई. वे लोग भी सच का पता लगाने के लिए अपनी पूरी रिसर्च टीम के साथ मंदिर पहुंच गए.
वैज्ञानिकों ने जब मूर्ति की अच्छे से जांच पड़ताल की, तो वे भी दंग रह गए. उन्होंने भी माना कि हां, मूर्ति का साइज वाकई बड़ा हो रहा है. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई जादू टोना या भूतिया चमत्कार नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रकृति का एक बहुत ही दिलचस्प नियम काम कर रहा है.
तो आखिर क्यों बढ़ रहा है नंदी का साइज?
वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की असली वजह समझाते हुए बताया कि यह नंदी मूर्ति जिस खास पत्थर से बनी है, उसका स्वभाव ही कुछ ऐसा है. इस पत्थर के अंदर फैलने वाले तत्व मौजूद हैं, जिसे विज्ञान की भाषा में सिलिका और दूसरे मिनरल्स का केमिकल रिएक्शन कहा जाता है. होता यह है कि जब भी मौसम बदलता है या हवा में जो नमी (पानी के बारीक कण) होती है, वह इस पत्थर के संपर्क में आती है. इससे पत्थर धीरे धीरे फूलने लगता है. बस यही वजह है कि पत्थर भारी होता जा रहा है और नंदी जी की मूर्ति का आकार लगातार बड़ा होता दिख रहा है.
टूटे अंगूठे की कहानी और बंद हुआ रास्ता
इस मंदिर को लेकर बुजुर्ग एक पुरानी कहानी भी सुनाते हैं. कहते हैं कि बहुत समय पहले ऋषि अगस्त्य यहां भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनाना चाहते थे. लेकिन जब मूर्ति बनाई जा रही थी, तो अचानक उसके पैर का अंगूठा टूट गया. इस बात से ऋषि बहुत दुखी हुए और उन्होंने भगवान शिव को याद करते हुए भारी तपस्या शुरू कर दी.
उनकी तपस्या से खुश होकर भोलेनाथ माता पार्वती के साथ वहां प्रकट हुए और फिर इस उमा महेश्वर मंदिर की शुरुआत हुई. पुराने जमाने में इस नंदी मूर्ति को ऐसे रखा गया था कि लोग आराम से इनके चारों तरफ घूमकर परिक्रमा कर सकें, लेकिन मूर्ति का साइज इतना बढ़ चुका है कि अब वह घूमने वाला रास्ता ही पूरी तरह बंद हो गया है.
कौवों को श्राप और कलयुग के अंत की बात
इस मंदिर से जुड़ी एक और मजेदार बात यह है कि आपको पूरे मंदिर परिसर में कभी एक भी कौवा देखने को नहीं मिलेगा. इसके पीछे भी एक कहानी है कि जब ऋषि अगस्त्य यहां ध्यान लगाकर बैठे थे, तो कुछ कौवे वहां आकर कांव कांव करने लगे जिससे उनका ध्यान टूट गया.
गुस्से में आकर ऋषि ने कौवों को श्राप दे दिया कि आज के बाद कोई कौवा इस मंदिर के आसपास भी नहीं भटकेगा. वहीं, नंदी बाबा को लेकर लोग यह भी मानते हैं कि जिस दिन यह मूर्ति पूरी तरह बड़ी होकर अपने पैरों पर खड़ी हो जाएगी, समझो उसी दिन इस दुनिया से कलयुग का अंत हो जाएगा.


