अमरनाथ यात्रा के दो अमर कबूतरों की कहानी सुनी है? कहते हैं जिस व्यक्ति को इन सफेद रंग के दो अमर कबूतरों के दर्शन होते हैं उसकी किस्मत चमक जाती है। दरअसल इन कबूतरों का दिखना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन होने का मतलब है कि आपको सीधे भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त हो गया है। पौराणिक कथाओं अनुसार ये कोई साधारण कबूतर नहीं हैं। ये वो अमर पक्षी हैं जिन्होंने भगवान शिव द्वारा बताई गई अमर कथा सुन ली थी। जिसके कारण ये अमर हो गए और बताया जाता है कि ये आज भी अमरनाथ यात्रा पर आए कुछ सौभाग्यशाली लोगों को दिखाई देते हैं। चलिए जानते हैं इन कबूतरों के अमर होने की कथा।
जब माता पार्वती ने अमर कथा सुनने की जताई इच्छा
अमरनाथ यात्रा की पौराणिक कथा अनुसार, एक समय माता पार्वती ने भगवान शिव से उनकी अमरता के रहस्य के बारे में जानने की इच्छा जताई। माता पार्वती के बार-बार अनुरोध करने पर भगवान शिव इस अमरकथा को सुनाने के लिए तैयार हो गए। महादेव ने इस कथा को सुनाने के लिए एक ऐसा स्थान चुना जहां पर कोई दूसरा प्राणी या जीव-जंतु मौजूद न हो। ये ऐसी पावन कथा थी जिसे सुनने वाला व्यक्ति अमर हो सकता था, इसलिए भगवान ने माता पार्वती को ये कथा सुनाने के लिए हिमालय की एक गुप्त गुफा को चुना। आज इसी गुफा में बाबा बर्फानी अपने दर्शन देते हैं, जिसे सभी अमरनाथ गुफा के नाम से जानते हैं।
भगवान शिव ने अमरनाथ गुफा का किया चयन
इस गुप्त कथा को सुनाने से पहले भगवान शिव ने एक जगह अपने वाहन नंदी को छोड़ा। जिस स्थान पर नंदी महाराज को छोड़ा गया, उसे पहलगाम के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा की शुरुआत यहीं से करते हैं। इसके बाद शिवजी ने अपनी जटाओं से चंद्रमा को निकालकर अलग किया, जिस स्थान पर उन्होंने ऐसा किया उसे चंदनवाड़ी कहते हैं। इसके बाद शिव ने गंगा जी को पंचतरणी में और अपने गले के सांप को शेषनाग में छोड़ा। इसी कारण से इस स्थान का नाम शेषनाग पड़ा। इसी तरह एक स्थान पर महादेव ने अपने पुत्र गणेश जी को छोड़ा, जिसे गणेश टॉप कहा जाता है। वहीं पिस्सू घाटी पर पिस्सू नामक कीड़े का त्याग किया। सभी चीजों को छोड़ने के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ अमरनाथ गुफा में प्रवेश किया।
माता पार्वती की जगह कबूतरों ने सुन ली ये पावन कथा
इसके बाद भगवान शिव ने माता को कथा सुनानी शुरू की। कथा सुनते-सुनते देवी पार्वती को नींद आ गई। लेकिन भगवान शिव कथा में इतने लीन हो गए थे कि उनका ध्यान माता पार्वती की तरफ गया ही नहीं। कथा के बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज आ रही थी जिससे भगवान को लगा कि देवी पार्वती ही बीच-बीच में हुंकार भर रही हैं। लेकिन ये आवाज माता पार्वती की नहीं बल्कि दो कबूतरों की थी, जो बड़े ही ध्यान से इस दिव्य कथा को सुन रहे थे। कथा समाप्त करने के बाद जब भगवान शिव का ध्यान माता पार्वती पर गया तो उन्होंने देखा कि वो तो सो रही हैं। फिर ये कथा किसने सुन ली? तब भगवान की दृष्टि कबूतरों पर पड़ी जिससे भगवान को क्रोध आ गया।
इस तरह अमर हो गया कबूतर का जोड़ा
कबूतर का जोड़ा तुरंत भगवान शिव की शरण में आ गया और कहने लगा कि भगवान हमने अमर कथा सुनी है। ऐसे में अगर आप हमें मारेंगे तो यह कथा झूठी हो जाएगी, इसलिए हम पर कृपा करें। इसके बाद भगवान शिव ने उन कबूतरों को जीवनदान दे दिया। साथ ही यह वरदान भी दिया कि तुम दोनों अब हमेशा के लिए अमर हो गए हो और तुम अब इसी जगह पर मेरे और पार्वती के प्रतीक के रूप में हमेशा निवास करोगे। मान्यता हैं अमरनाथ यात्रा पर आए कई श्रद्धालुओं को इन कबूतरों के दर्शन हुए थे।
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