“साइलेंट थीफ ऑफ विजन” पर देशभर की महिलाओं की चेतना—ग्लूकोमा व मायोपिया पर राष्ट्रीय वेबीनार में हजारों की भागीदारी…

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सारंगढ़। आंखों की गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अभामाम सम्मेलन द्वारा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। 22 अप्रैल 2026 को आयोजित इस वेबीनार में देशभर से हजारों महिलाओं ने ऑनलाइन जुड़कर भागीदारी निभाई।
यह कार्यक्रम अभामाम सम्मेलन के राष्ट्रीय नेत्र एवं देहदान प्रकल्प के अंतर्गत आयोजित किया गया, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती रेखा राठी एवं राष्ट्रीय सचिव श्रीमती बबीता बगड़िया के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
वेबीनार में सरोज सुनालिया एवं डॉ. राजकुमारी जैन की विशेष उपस्थिति रही। मुख्य वक्ता के रूप में ग्लूकोमा सर्जन डॉ. प्रीति कामदार एवं प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अर्चना कश्यप ने प्रतिभागियों को ग्लूकोमा एवं मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉक्टरों ने बताया कि ग्लूकोमा को “साइलेंट थीफ ऑफ विजन” कहा जाता है, क्योंकि इसमें दृष्टि धीरे-धीरे कम होती है और मरीज को लंबे समय तक इसका पता नहीं चलता। एक बार दृष्टि चली जाए तो उसे वापस पाना संभव नहीं होता, इसलिए हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच अवश्य करवानी चाहिए।
वहीं मायोपिया के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन के उपयोग तथा बच्चों के मैदानी खेलों से दूर होने के कारण यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
कार्यक्रम के दौरान ग्लूकोमा और मायोपिया विषय पर प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसका संचालन क्विज संयोजक मधु डुमरेवाल ने किया। देशभर की विभिन्न शाखाओं से आई महिलाओं ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेताओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
अंत में अध्यक्ष श्रीमती रेखा राठी ने कहा, “आंखें अनमोल हैं, इनके प्रति जागरूकता फैलाना हम सभी का कर्तव्य है।” कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय सचिव श्रीमती बबीता बगड़िया के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।

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