सारंगढ़ | नगर पालिका सारंगढ़ की सियासत में ‘शह और मात’ के खेल के बीच एक बड़ा उलटफेर हुआ है। राज्य शासन द्वारा पद से पृथक की गईं नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सोनी अजय बंजारे को माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने शासन के निष्कासन आदेश पर स्टे (स्थगन) देते हुए उन्हें पुनः अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन विभाग ने 20 मार्च 2026 को एक आदेश जारी कर श्रीमती बंजारे को धारा 41-ए के तहत अध्यक्ष पद से हटा दिया था। साथ ही, उन्हें आगामी कार्यकाल के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इस कार्रवाई को अध्यक्ष ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में चुनौती दी थी।
कोर्ट का फैसला और बहाली-
रिट याचिका क्रमांक WPC 1504/2026 पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने 20 अप्रैल 2026 को शासन के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अगली सुनवाई तक अध्यक्ष के रूप में यथावत कार्य करती रहेंगी।
उपस्थिति प्रतिवेदन जमा-
कोर्ट के आदेश की प्रति मिलते ही सोनी अजय बंजारे ने नगर पालिका परिषद सारंगढ़ में अपना उपस्थिति प्रतिवेदन (Joining Report) प्रस्तुत कर दिया है।
पिछले कुछ समय से अध्यक्ष की अनुपस्थिति और प्रशासनिक खींचतान के कारण शहर के विकास कार्य ठप पड़े थे। अब अध्यक्ष की वापसी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रुके हुए जनहित के कार्यों में तेजी आएगी और नगर सरकार नई ऊर्जा के साथ काम करेगी।
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