कुत्ता काटने के कितने घंटे के भीतर इंजेक्शन लगवाना है जरूरी? लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानें एक्सपर्ट की राय…
कुत्ते का काटना केवल एक शारीरिक घाव नहीं, बल्कि एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हो सकता है। अगर कुत्ता रेबीज से संक्रमित है, तो एक छोटी सी खरोंच भी जानलेवा साबित हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान में रेबीज को एक ऐसी बीमारी माना जाता है जिसके लक्षण दिखने के बाद कोई इलाज संभव नहीं है, लेकिन सही समय पर लिया गया वैक्सीनेशन इसे 100% रोक सकता है।
अक्सर लोग जानकारी के अभाव में घरेलू नुस्खों या झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय बर्बाद कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद पहले कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
एशियन हॉस्पिटल में एसोसिएट डायरेक्टर और हेड- इंटरनल मेडिसिन (यूनिट III) में डॉ. सुनील राणा ने बताया कुत्ते के काटने के बाद समय पर इलाज न कराया जाए तो ये स्थिति गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। खासकर रेबीज संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, जो एक बार लक्षण आने के बाद लगभग असाध्य माना जाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कुत्ते के काटने के बाद शरीर में क्या होता, बॉडी में कौन से लक्षण दिखते हैं और कैसे फस्ट एड करें।
कुत्ते के काटने के बाद फस्ट एड कैसे करें?
डॉक्टरों के अनुसार कुत्ते के काटने के तुरंत बाद सबसे पहले घाव को साफ करना है। घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 10-15 मिनट तक धोएं। ध्यान रहे कि घाव पर पट्टी (Bandage) न बांधें और न ही टांके लगवाएं जब तक बहुत जरूरी न हो, क्योंकि इससे वायरस नसों में और गहराई तक जा सकता है। घाव को खुला छोड़ना या हल्का कवर करना ही बेहतर है। कुत्ता चाहे पालतू हो या आवारा उसके काटने पर तुरंत मेडिकल मदद और एंटी-रेबीज इंजेक्शन (ARV) लेना बेहद जरूरी होता है। तय समय के भीतर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी होता है। आमतौर पर 24 घंटे के अंदर वैक्सीन लगवा लेना सबसे सुरक्षित माना जाता है, हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जितनी जल्दी हो सके उतना बेहतर है।
कुत्ता काटने के बाद शरीर में क्या होता है
कुत्ते की लार में मौजूद वायरस या बैक्टीरिया घाव के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। अगर कुत्ता रेबीज से संक्रमित है तो वायरस धीरे-धीरे नसों के जरिए दिमाग तक पहुंच सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय के साथ ये बीमारी जानलेवा रूप ले सकती है। WHO की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, रेबीज एक Zoonotic यानी जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारी है। WHO का कहना है कि एक बार जब मरीज में रेबीज के लक्षण जैसे पानी से डरना या मतिभ्रम दिखने लगते हैं तो ये 100% मामलों में घातक होती है। दुनिया में अब तक ऐसे बहुत ही कम मामले हैं जहां लक्षण दिखने के बाद कोई व्यक्ति जीवित बचा हो।
शुरुआती लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
कुत्ता काटने के बाद शरीर में कुछ शुरुआती लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे,
घाव के आसपास दर्द या जलन
सूजन और लालीपन
हल्का बुखार
सिर दर्द या कमजोरी
घाव वाली जगह पर झनझनाहट
अगर संक्रमण बढ़ता है तो बाद में गंभीर लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे-
पानी से डर लगना (हाइड्रोफोबिया)
सांस लेने में परेशानी
बेचैनी और भ्रम
मांसपेशियों में ऐंठन
क्या कहते हैं डॉक्टर
संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। डॉ. सुनील राणा ने बताया कुत्ते के काटने के बाद सबसे जरूरी है कि घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 10-15 मिनट तक अच्छी तरह धोया जाए। इसके बाद बिना देर किए नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना चाहिए। इलाज में देरी करने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अगर घाव गहरा है या खून ज्यादा निकला है तो मरीज को एंटी-रेबीज वैक्सीन के साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन भी दिया जाता है, जो शुरुआती चरण में वायरस को फैलने से रोकने में मदद करता है। एक्सपर्ट के मुताबिक जागरूकता और समय पर इलाज से रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है। इसलिए कुत्ते के काटने की घटना को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
कितने दिन तक लगते हैं इंजेक्शन
डॉक्टरों के मुताबिक एंटी-रेबीज वैक्सीन एक तय शेड्यूल के अनुसार लगाई जाती है। आमतौर पर यह 0, 3, 7, 14 और 28 दिन के अंतराल पर दी जाती है। कोर्स पूरा करना बेहद जरूरी होता है। हालांकि कुत्ते के काटने की गंभीरता (Category I, II, or III) के आधार पर डॉक्टर इंजेक्शन की संख्या तय करते हैं।
बचाव के लिए क्या करें
कुत्ता काटते ही घाव को तुरंत धोएं
जल्द से जल्द अस्पताल जाकर वैक्सीन लगवाएं
घाव पर मिट्टी, तेल या कोई घरेलू चीज न लगाएं
पूरा वैक्सीन कोर्स जरूर पूरा करें
बच्चों को आवारा कुत्तों से दूर रहने की सलाह दें
सावधानी:
रेबीज के लक्षण दिखने के बाद कोई इलाज संभव नहीं है। इसलिए कुत्ते के काटने (या खरोंच लगने) को कभी भी छोटा न समझें। घरेलू उपचार या ‘झाड़-फूंक’ के चक्कर में समय बर्बाद न करें, तुरंत डॉक्टर से मिलें।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जागरूकता के लिए है और इसमें दी गई जानकारी एशियन हॉस्पिटल के डॉ. सुनील राणा के इनपुट्स पर आधारित है। कुत्ते के काटने या खरोंच लगने की स्थिति में इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, इसलिए किसी भी उपचार या घरेलू नुस्खे से पहले तुरंत नजदीकी अस्पताल या संक्रामक रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। जंसत्ता किसी भी देरी या गलत उपचार के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।
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