बैंगलोर: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर मामले में 16 नवंबर 2021 को सुनवाई की
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ऋतु राज अवस्थी और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मागादुब ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कर्नाटक सरकार से सवाल किया कि आखिर अनुमति से पहले 16 मस्जिदों द्वारा लाउडस्पीकर का उपयोग किस प्रावधान के तहत हुआ और ध्वनि प्रदूषण के मद्देनज़र इन्हें प्रतिबंधित करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।

बता दें कि थानिसंद्रा मेन रोड स्थित आइकॉन अपार्टमेंट के 32 निवासियों ने लाउडस्पीकर और माइक द्वारा हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर 16 मस्जिदों के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की थी। अदालत में राकेश पी और अन्य की तरफ से पेश हुए वकील श्रीधर प्रभु ने कहा कि लाउडस्पीकर और माइकों के उपयोग को हमेशा चलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने अपनी याचिका में नियम 5 (3) का हवाला दिया। ये नियम लाउडस्पीकर के उपयोग को प्रतिबंधित करता है। ये राज्य सरकार को अधिकार देता है कि वो रात में होने वाले किसी धार्मिक, सांस्कृतिक या त्योहार पर कुछ वक़्त के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को मंजूरी दे दें। मगर ये सब भी साल में 15 दिन से अधिक के लिए नहीं।
वकील ने बताया कि कर्नाटक वक्फ बोर्ड को ऐसे मामलों में इजाजत देने का अधिकार नहीं है, जिनका सर्कुलर दिखाकर कहा जा रहा है कि इस वजह से मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाए गए। वहीं मस्जिद पक्ष द्वारा इस याचिका का विरोध किया गया और कहा गया कि उन्होंने पुलिस से अनुमति ली थी। उनके अनुसार, लाउडस्पीकर ऐसे डिवाइस के साथ लगाए गए हैं जिससे किसी एक निर्धारित जगह से अधिक आवाज नहीं जाएगी। इसके साथ ही लाउडस्पीकर प्रतिबंधित वक़्त यानी कि 10 से 6 बजे के बीच भी नहीं बजाया जाता।

