रायगढ़। मनरेगा की डबरी योजना को लेकर लैलूंगा क्षेत्र में हंगामा खड़ा करने वाला मामला अब नए मोड़ पर पहुँच गया है। ग्राम पंचायत कुंजारा के हितग्राही नरेश गुप्ता ने रोजगार सहायक व पंचायत सचिव पर डबरी निर्माण में ₹1,35,000 हड़पने का आरोप लगाते हुए जनपद पंचायत, एसडीएम और यहां तक कि प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी तक शिकायत की थी लेकिन अब जांच में डबरी चोरी का आरोप फर्जी पाया गया है।

बता दें कि कागज़ों में तालाब खोदने और जमीनी हकीकत में “एक इंच भी मिट्टी न हिलने” की बात कहकर नरेश गुप्ता ने नवाखाई त्योहार पर तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन तक शुरू कर दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया था। जिस पर उच्च अधिकारियों द्वारा जांच करने का लिखित आश्वासन देना पड़ा था।

जांच का सच सामने…..
जब अफसर मौके पर जांच के लिए पहुँचे तो वहां डबरी वास्तव में निर्मित पाई गई। यानि, जिस आधार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था, वह झूठा साबित हुआ। नरेश गुप्ता पिता मंगल गुप्ता का डबरी नरवा योजना के तहत मनरेगा से स्वीकृत हुआ था जिसका स्वीकृति क्रमांक -1064 वर्ष 2021-22 है। शिकायतकर्ता के आरोप में वर्ष 2023-24 का उल्लेख किया है जबकि वर्ष 2023-24 में नरेश गुप्ता के नाम से कोई डबरी स्वीकृत हुआ ही नहीं है। वर्ष 2021-22 में नरेश के नाम से स्वीकृत डबरी निर्माण कार्य एजेंसी द्वारा हितग्राही के दिये गये खसरा B1 के जगह पर डबरी निर्माण का कार्य किया गया है। जिसकी जांच दल द्वारा के मौका पंचनामा तैयार कर प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया गया है।


बहरहाल अब बड़ा सवाल यह है कि शिकायतकर्ता ने शासन–प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश करने वाले पर क्या कार्यवाही होगी? क्या गलत तथ्यों के आधार पर मंत्री और अफसरों तक पहुँचाई गई झूठी शिकायत पर अब FIR दर्ज होगी?…


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