किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर! ‘इस’ तारीख से बेमौसमी बारिश की संभावना, किसानों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
राज्य में मौसम (Weather) में लगातार बदलाव हो रहा है। कहीं ठंड का जोर (Cold Weather) महसूस हो रहा है, तो कहीं बादल छाए हुए हैं। इन बदलते मौसम के कारण किसान (Farmers) चिंतित हैं।
क्योंकि बदलते मौसम का असर फसल पर पड़ रहा है।
इस बीच, मौसम वैज्ञानिक पंजाबराव डख (Panjabrao Dakh) ने जो अनुमान जताया है, उसके अनुसार, राज्य में बेमौसमी बारिश की संभावना है। राज्य में 20 तारीख तक मौसम शुष्क रहेगा। इसके बाद 21 तारीख से राज्य में बेमौसमी बारिश की संभावना जताई गई है, इस बारे में पंजाबराव डख ने जानकारी दी है।
पंजाबराव डख ने क्या कहा?
पंजाबराव डख ने मौसम का नया अनुमान प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, राज्य में बेमौसमी बारिश की संभावना है। महाराष्ट्र में 21 दिसंबर से 26 दिसंबर तक अलग-अलग हिस्सों में बेमौसमी बारिश हो सकती है। राज्य में 19 तारीख तक कड़ाके की ठंड पड़ने की जानकारी पंजाबराव डख ने दी है।
किसानों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
वर्तमान में कई किसानों की प्याज की कटाई चल रही है। जिन किसानों का प्याज काटने का समय आ चुका है, उन्हें प्याज को काटकर ढककर रखने की सलाह पंजाबराव डख ने दी है। क्योंकि महाराष्ट्र में 21 दिसंबर से 26 दिसंबर तक अलग-अलग हिस्सों में बेमौसमी बारिश हो सकती है। राज्य में 19 तारीख तक कड़ाके की ठंड पड़ेगी। जो तिरुपति दर्शन के लिए जाने वाले हैं, उनके लिए महत्वपूर्ण जानकारी है। 17, 18, 19 दिसंबर को तिरुपति, तमिलनाडु क्षेत्र में बेमौसमी बारिश की संभावना जताई गई है, यह जानकारी पंजाबराव डख ने दी है। आने वाले कुछ दिनों में ठंड का माहौल रहेगा। किसानों को रबी फसलों की सिंचाई, घास नियंत्रण और उर्वरक योजना को ध्यान में रखते हुए फसल वृद्धि की दर को संतुलित करना चाहिए।
किसानों को ठंड का लाभ उठाना चाहिए, क्योंकि दिसंबर के महीने में ठंडी के अनुसार, आखिरी सप्ताह में अधिकतम और न्यूनतम तापमान औसत से अधिक रहने की संभावना है, जिससे ठंड औसत से कम महसूस हो सकती है।
बेमौसमी बारिश के अनुमान से किसानों में डर
बेमौसमी बारिश के अनुमान से किसानों में डर का माहौल है, क्योंकि यह बारिश फसल के लिए खतरनाक होती है। इसके कारण अंगूर, अनार और केले उत्पादक किसान चिंतित हैं। हालांकि, फिलहाल राज्य में बारिश का मौसम शांत हो गया है। फिर से राज्य में ठंड का जोर बढ़ गया है। लेकिन 21 दिसंबर से राज्य में विभिन्न हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई है। किसानों को हर साल प्राकृतिक आपदाओं का बड़ा असर झेलना पड़ता है। इस संकट के कारण कई बार हाथ में आई फसल भी नष्ट हो सकती है।
