पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार एम्स के पास रहने वाले मनीष पाठक की रिपोर्ट पर एफआईआर के बाद जांच भी शुरू कर दी गई है। उनके मुताबिक अफसर के आधार कार्ड और पैनकार्ड का उपयोग करके उनकी जानकारी के बगैर पाठक इंटरप्राइजेस और आयशा इंटरप्राइजेस नाम की कंपनी बनाई गई है।

उक्त कंपनी से दो करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन भी किया गया है। आशंका है कि आधार कार्ड और पैनकार्ड जैसी आइडी किसी फर्जीवाड़े के जरिए आनलाइन ही हासिल की गई होगी।
पेशे से सीए और ट्रांसपोर्टिंग कारोबार से जुड़े अंकित बांगर को अपने नाम से कंपनी होने की जानकारी तब मिली, जब उन्होंने आइटी रिटर्न जमा करने के लिए फार्म निकाला। इससे पता चला कि उनके पैन नंबर से हैदराबाद में कंपनी चल रही है। उनके जीएसटी नंबर पर करोड़ों रुपये का कारोबार किया जा रहा है। इसके बाद विधानसभा थाने में अपराध दर्ज किया गया।
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