छत्तीसगढ़: किसान के नामिनी पत्नी, पुत्र , पुत्री , दामाद भी बेच सकेंगे धान…
समर्थन मूल्य पर होने वाली धान की खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने नई व्यवस्था लागू की गई है। इस साल किसानों की पहचान बायोमेट्रिक के जरिए की जाएगी। अब तक राशन दुकानों में ही राशन लेने के लिए नामिनी बनाने की सुविधा दी गई थी, लेकिन अब उसी तर्ज पर धान खरीदी में भी यह सुविधा लागू की गई है।
यदि कोई किसान खरीदी केंद्र जाकर धान नहीं बेच सकता है तो वह अपने मां, पिता, पति, पत्नी, पुत्र, दामाद, बेटी, बहू, सगे भाई, बहन और अन्य करीबी रिश्तेदार को नामिनी बनाकर धान की बिक्री कर सकेगा।
खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर होने वाली धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने किसानों की पहचान उपरांत धान खरीदी बायोमेट्रिक प्रणाली से किया जाएगा। पिछले साल की तुलना में इस साल अध्ािक धान खरीदी की संभावना को देखते हुए धान बेचने आने वाले किसानों का मौके पर फिंगर प्रिंट लिया जाएगा, उसके बाद ही धान खरीदी होगी। धान खरीदी को लेकर प्रशासन और विभाग नेतैयारियां शुरू कर दी है। इस बार धान खरीदी को लेकर विभाग ने अहम बदलाव किया है। जिसके तहत किसान पहली बार फिंगरप्रिंट के जरिए धान विक्रय करेंगे। किसानों की उंगलियों के निशान से उनकी पहचान सुनिश्चित होगी, उसके बाद ही धान समिति में क्रय किया जा सकेगा। धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कसावट लाने की मंशा से यह नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। धान खरीदी के समय किसानों को फसल की वाजिब कीमत दिलाने और बिचौलियों को रोकने के लिए, बायोमेट्रिक सेवा की शुरु की गई है।
कई वृद्ध किसानों का बायो मेट्रिक्स निशान नहीं आता है। ऐसे में उन्हें नामिनी बनाने की सुविधा दी जा रही है, जो नामिनी नहीं बनाएंगे वे ट्रस्टेड पर्सन (विश्वसनीय व्यक्ति ) की मदद से भी अपनी उपज बेच सकेंगे। किसान यदि खरीदी केंद्र जाकर धान नहीं बेच सकता तो वह अपने मां, पिता, पति, पत्नी, पुत्र, दामाद, बेटी, बहू, सगे भाई, बहन और अन्य करीबी रिश्तेदार को नामिनी बना सकता है। इसके अलावा वह किसी को भी नामिनी नियुक्त नहीं कर सकेगा। किसान विश्वसनीय व्यक्ति द्वारा बायोमेट्रिक एथेंटिकेशन कर धान बेच सकता है।
मशीन में दिक्कत होने पर मोबाइल में भेजेंगे ओटीपी
समितियों में किसानों को कोई परेशानी न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। किसान द्वारा या नामित व्यक्ति द्वारा अगर किसी कारणवश धान बेचने में कोई दिक्कत हो तो एक – एक विश्वसनीय व्यक्ति की नियुक्ति कलेक्टर द्वारा की जाएगी। वह किसान को धान बेचने में मदद करेगा। किसान का आधार मशीन में स्वीकार नहीं होने पर किसान के पंजीकृत मोबाइल नंबर में ओटीपी आएगा, जिसका उपयोग कर धान खरीदी प्रक्रिया संपादित की जाएगी। इससे कार्य में पारदर्शिता आएगी।
समिति प्रबंधकों का आधार कार्ड अनिवार्य
धान खरीदी केन्द्रों में इस प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए समिति प्रबंधकों का आधार भी अनिवार्य किया गया है। नवीन धान पंजीयन एवं रकबा संशोधन के लिए किसानों को जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक पासबुक, आधार कार्ड की फोटोकापी, बी – 1 पी – 2, ऋण पुस्तिका की फोटोकापी, नामिनी का आधार कार्ड की फोटोकापी, अन्य हिस्सेदार का सहमति प्रमाण-पत्र, मोबाइल नंबर, 01 नग फोटो के साथ समिति का सदस्य होना अनिवार्य है।
किसानों के आधार नंबर लिंक कर डाटा तैयार
समितियों में किसानों के आधार नंबर लिंक कर डाटा तैयार किया जा रहा है, जिसमें पहले से ही किसानों के बायोमेट्रिक रिकार्ड दर्ज होते हैं। खरीदी के वक्त इसी रिकार्ड से मिलान कर खरीदी की जाएगी। इस सुविधा के लागू होने से धान खरीदी में होने वाली गड़बड़ी में काफी हद तक रोक लगने की संभावना जताई जा रही है। अब वही किसान धान बेच सकेंगे जो धान उगाएंगे या फिर उनके द्वारा तय व्यक्ति धान की बिक्री कर सकेंगे। हालांकि पहले से पंजीकृत किसानों को सहकारी समिति द्वारा साफ्टवेयर के लागिन में मैन्युअली कैरी फारवर्ड किया जाएगा।
अब तक 362 नए किसानों का पंजीयन
नए पंजीयन और पंजीयन में संशोधन के लिए किसानों को जरूरी दस्तावेज जैसे ऋण पुस्तिका बी -1, आधार नंबर, पासबुक की छायाप्रति आदि अपनी सहकारी समिति में जमा करानी होगी। दस्तावेजों के परीक्षण और सत्यापन के बाद सहकारी समिति द्वारा एकीकृत किसान पोर्टल में किसानों का पंजीयन किया जाएगा। पंजीयन में संशोधन के लिए 30 सितंबर तक समिति में आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा। नया पंजीयन और पंजीकृत फसल या रकबे में संशोधन का काम 31 अक्टूबर तक पूरा करना होगा।
कैरीफारवर्ड में प्रदेश में पहले स्थान पर जिला
जांजगीर चांपा जिले में पहले से पंजीकृत किसानों का सहकारी समिति द्वारा साफ्टवेयर के लागिन में मैन्युअली कैरीफारवर्ड किया जा रहा है। कैरी फारवर्ड के मामले में जिला 34 प्रतिशत के साथ पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। जबकि 33 प्रतिशत के साथ बालोद जिला दूसरे और 30 प्रतिशत के साथ बलरामपुर जिला तीसरे स्थान पर है। जिले में पिछले साल 1 लाख 17 हजार किसान पंजीकृत थे जिसमें से अब तक 39 हजार 592 किसानों का कैरी फारवर्ड किया जा चुका है। इसी तरह बालोद में पिछले साल 1 लाख 42 हजार किसान पंजीकृत थे जिसमें से 45 हजार 574 किसानों का कैरीफारवर्ड किया जा चुका है।
”” किसी भी तरह की फर्जी खरीदी रोकने के लिए इस साल आधार नंबर बायोमेट्रिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें धान बेचने के लिए किसानों को स्वयं अथवा उनके द्वारा नामित व्यक्ति धान बेचते समय अपने अंगूठे के निशान की मदद से आधार कार्ड पर आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कोई किसान यदि ध्ाान बेचने के लिए समिति नहीं आ सकता है वह अपने नामिनी के माध्यम से धान बेच सकेगा।
अश्वनी पांडेय
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