तीन साल की मासूम का अपहरण करने के बाद दुष्कर्म और फिर हत्या कर शव छिपाने के एक मामले में विशेष न्यायाधीश पाक्सो अधिनियम योगेश कुमार ने आरोपित को उम्रकैद और 60 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया।

जुर्माने से 50 हजार रुपये की राशि प्रतिकर के रूप में मासूम के स्वजन को देने के आदेश दिए। न्यायालय ने हत्या और दुष्कर्म दोनों धाराओं में उम्रकैद की सजा दी है।
बाबूपुरवा के चार रोड चौराहा निवासी रिक्शा चालक सुरेश क्षेत्र में स्थित चाय की दुकान पर हर दिन चाय पीने जाता था। चाय वाले की तीन वर्षीय दिव्यांग बेटी को वह अक्सर टाफी देकर दुलार करता था। चार जून 2015 को सुरेश नशे में आया और बच्ची को रिक्शा में बिठाकर ले जाने लगा। बच्ची रोने लगी तो मां दौड़कर बाहर आई और बच्ची को रिक्शे से उतार लिया और सुरेश को भला बुरा कहा।
यह बात उसे नागवार गुजरी तो उसने देख लेने की धमकी दी। दूसरे दिन पांच जून की रात आठ बजे बच्ची गायब हो गई, जिसकी तहरीर स्वजनों ने छह जून को बाबूपुरवा थाने में दी। बच्ची का शव लोको साउथ कालोनी पटरी के पूर्वी छोर पर पड़ा मिला।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म होने और गला दबाकर हत्या की बात सामने आई। स्वजन की तहरीर पर पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार किया तो उसने घटना कबूल कर ली और घटनास्थल भी दिखाया। सहायक शासकीय अधिवक्ता विवेक शुक्ल, विशेष लोक अभियोजक चंद्रकांत शर्मा और गंगाप्रसाद यादव ने बताया कि साक्ष्यों और गवाहों की रोशनी में न्यायालय ने सुरेश को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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