सारंगढ़। दहेज प्रताड़ना से परेशान एक महिला के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर सहारा बनकर सामने आया। केंद्र की पहल और पुलिस के सहयोग से पीड़िता को विवाह में प्राप्त सामान वापस दिलाया गया। इस कार्रवाई से महिला को राहत मिली और संकट की घड़ी में महिला सहायता केंद्रों की भूमिका एक बार फिर सामने आई।
पीड़िता के अनुसार, शादी के महज एक माह बाद ही पति ने स्कूटी की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। महिला के माता-पिता स्कूटी की किस्त चुकाने के लिए तैयार भी हो गए, लेकिन इसके बावजूद पति की मांगें खत्म नहीं हुईं। आरोप है कि पति हर महीने 20 हजार रुपये की मांग करने लगा और महिला को शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा। लगातार बढ़ती प्रताड़ना से परेशान होकर महिला ने सखी वन स्टॉप सेंटर में शिकायत दर्ज कराई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला संरक्षण अधिकारी विभा बख्शी के निर्देशन में पति की काउंसलिंग की गई। इसके बाद केंद्र की संयुक्त टीम ने पुलिस के सहयोग से मौके पर पहुंचकर महिला को उसके विवाह में प्राप्त सामान वापस दिलाया। केंद्र की पहल से पीड़िता को राहत मिली और उसकी शिकायत के निराकरण की दिशा में कार्रवाई की गई।
सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को हिंसा, प्रताड़ना और अन्य कठिन परिस्थितियों में सहायता उपलब्ध कराने के लिए कार्य कर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र में कुल 104 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 86 प्रकरणों का सफल निराकरण किया जा चुका है।
यह मामला बताता है कि दहेज की मांग और प्रताड़ना से जूझ रही महिलाओं के लिए समय पर शिकायत करना और सहायता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। सखी वन स्टॉप सेंटर की पहल महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और न्याय की दिशा में सहयोग प्रदान कर रही है।
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