वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पावन मोहिनी एकादशी इस वर्ष 27 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन तुलसी की मंजरी से जुड़े कुछ विशेष उपाय भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खोल सकते हैं।

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है।

पंचांग की गणना बताती है कि एकादशी तिथि रविवार 26 अप्रैल को शाम 6 बजकर 08 मिनट से प्रारंभ होकर सोमवार 27 अप्रैल को शाम 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगी, जिसके चलते उदया तिथि की मान्यता के अनुसार 27 अप्रैल को ही व्रत रखना शास्त्र सम्मत होगा। इस शुभ अवसर पर तुलसी की मंजरी का प्रयोग अत्यंत चमत्कारी माना गया है। यदि भक्त एक तांबे के पात्र में गंगाजल लेकर उसमें तुलसी की मंजरी डालें और उस जल का पूरे घर में छिड़काव करें, तो घर से नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता का नाश होता है। इसके अलावा आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे तुलसी की सूखी हुई मंजरी को लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन स्थान पर रखें, जिससे धन में अपार वृद्धि के योग बनते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मोहिनी एकादशी की शाम को दूध में तुलसी मंजरी मिलाकर भगवान विष्णु का अभिषेक करने से कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है और आय के नए स्रोत खुलने लगते हैं। हालांकि भक्तों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना और जल चढ़ाना वर्जित होता है, इसलिए इन उपायों के लिए मंजरी एक दिन पूर्व ही तोड़कर रख लेनी चाहिए।
इस पावन तिथि पर दान-पुण्य का भी अनंत फल मिलता है। भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन पीले वस्त्रों, पीली मिठाई और मौसमी फलों का दान करने से आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अन्न दान करने से घर में कभी धान्य की कमी नहीं होती और ब्राह्मणों को दक्षिणा देने से जीवन में स्थिरता आती है। सच्चे मन से किया गया यह व्रत और मंजरी के ये सरल उपाय न केवल पापों का शमन करते हैं बल्कि भक्तों को श्रीहरि की विशेष कृपा का पात्र भी बनाते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन स्वयं को शुद्ध करने और अपनी तकदीर को बदलने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है, जिससे परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य का आगमन सुनिश्चित होता है।
