सारंगढ़। जिले के ग्राम पंचायत बोन्दा से लेकर साल्हेओना तक इन दिनों क्रेशरों और वैध-अवैध डोलोमाइट खदानों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। आरोप है कि क्रेशर संचालक प्रशासन से सांठगांठ कर मनमाने तरीके से खनन कर रहे हैं और शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इधर जहां एक ओर प्रशासन और खदान संचालकों पर “मलाई खाने” के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीण धूल, प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने को मजबूर हैं।

35 एकड़ खदान विस्तार पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार 4-5 क्रशर इकाइयों द्वारा लगभग 35 एकड़ भूमि में खदान विस्तार का प्रस्ताव रखा गया है। इसे लेकर शासन द्वारा ग्राम पंचायत बोन्दा मंडी प्रांगण में जनसुनवाई आयोजित की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनसुनवाई नियमों को ताक पर रखकर और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कराई जा रही है, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।
युवा कांग्रेस और छात्र संगठन मैदान में
इस मुद्दे पर युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष शुभम बाजपेयी ने कहा कि:
“यह लड़ाई केवल खदान बंद कराने की नहीं, बल्कि आम जनता के हक, जल-जंगल-जमीन और बच्चों के भविष्य की रक्षा की लड़ाई है।”
वहीं एनएसयूआई जिलाध्यक्ष ने गंभीर चिंता जताते हुए बताया कि प्रस्तावित खदानों में से एक खदान शासकीय विद्यालय, निजी विद्यालय और छात्रावासों से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित है।
बच्चों की सुरक्षा पर खतरा
छात्र संगठनों का कहना है कि खदान विस्तार और भारी वाहनों के परिवहन से:
सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ेगा
छात्रों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा
पढ़ाई का माहौल प्रभावित होगा
एनएसयूआई ने साफ कहा है कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
“धनबल से पंचायतों को किया जा रहा प्रभावित”
स्थानीय युवा कांग्रेस नेता नितिन पाणिग्राही ने आरोप लगाया कि:
“क्रेशर मालिक धनबल के दम पर आसपास की पंचायतों को अपने पक्ष में कर चुके हैं। यहां सरकार और मालिक दोनों जनता को नजरअंदाज कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि युवा कांग्रेस सभी वैध दस्तावेजों के साथ जनसुनवाई का पुरजोर विरोध करेगी।
ग्रामीणों का बढ़ता आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि वे अब अपने स्वास्थ्य, आजीविका और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसी कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण युवा कांग्रेस के साथ मिलकर इस जनसुनवाई का विरोध करने की तैयारी में हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बढ़ते जनआक्रोश को कैसे संभालता है और क्या खदान विस्तार पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं।

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