सारंगढ़ ब्रेकिंग: सारंगढ़ का एक ऐसा गाँव जहाँ 4 नहीं 2 कंधे मे जाता है मृतक की अर्थियां ! बिना छाया के जलती है लाश ! मान्यता या मजबूरी? पढ़िए पुरी खबर…
सारंगढ़: कहा जाता है मरने के बाद व्यक्ति की अंतिम यात्रा चार कंधों पर जाती है लेकिन सारंगढ़ से लगे गांव माधोपाली में मरने वाले को दो ही कंधे नसीब हो पाते हैं। दरअसल श्मशान तक जाने रास्ता ही दो फीट चौड़ा है। वो भी खेतों के बीच मेड़ से होकर गुजरना पड़ता है। सारंगढ़ जिला मुख्यालय से 8 किमी दूरी पर स्थित माधोपाली में श्मशान घाट जाने रास्ता नहीं है। स्थल तक पहुंचने मशक्कत करनी पड़ती है। श्मशान घाट जाने से पहले तालाब पड़ता है, जहां ग्रामीण स्नान करते हैं। तालाब तक तो रास्ता सही है पर जैसे ही तालाब की पचरी खत्म होती, मेड़ पर बना कच्चा रास्ता है। ऐसा कर्ड बार हुआ है जब पार्थिव शरीर को कंधा देने वाले फिसले हैं और शव भी गिर चुका है।
शमशान घाट पर भी अतिक्रमण से नहीं चूक रहे लोग ? शिकायत पर सुनवाई नहीं –
ग्राम माधोपाली केभूतपूर्व सरपंच पंचराम पटेल,मोहितराम कहते हैं किसालों पहले श्मशान घाट के लिए जमीन 1 एकड़ थी। वर्तमान में 4 से 5 डिसमिल ही बच गई है। बाकी भूखंड को आसपास के किसानों ने खेती के लिए अतिक्रमण कर लिया है। मुक्तिधाम की स्थिति यह है कि अब वहां अंतिम संस्कार में जाने से लोगों को खड़े तक होने की ठीक से जगह नहीं बची है। साथ ही मुक्तिधाम जाने जो मार्ग था, वह कुछ दिन पहले चौड़ा हुआ करता था। इसमें अंतिम संस्कार यात्रा आराम से निकल जाती थी। वतर्मान में 2 लोग साथ में गुजरें तो पार होना मुश्किल होगा।
सांप बिच्छू का भी मंडराता है रहता
गौरतलब है कि श्मशान घाट तक पहुंचना बड़ी चुनौती तो है ही, वहीं सफाई के अभाव में यहां जहरीले सांप बिच्छू का डर होता है। बारिश के इन दिनों में घास, पेड़ पौधे, लताएं उग आती हैं। शवयात्रा के दौरान झाड़ियां में फंसने से लोग गिरते हैं। ग्रामीणों का कहना कि दाह संस्कार के बाद अस्थि विसर्जन के लिए अस्थियां उठानी पड़ती है, जिसको बैठकर उठाया जाता है।
मुक्तिधाम में एक भी शेड नहीं बारिश के मौसम में होती है दिक्कत
गांव के पुजारी गंगादास वैष्णव और चुलामड़ी पटेल, दीपक पटेल कहते हैं कि माधोपाली के मुक्तिधाम की खराब स्थिति किसी से छिपी नहीं है। रास्ते की समस्या तो है ही। मुक्तिधाम में एक भी शेड नहीं है। सालों पहले शेड लगे थे पर आंधी तूफानों के कारण शेड उड़ गए हैं।बारिश के दिन में अगर किसी की मृत्यु होती है, मुक्तिधाम लाया जाता है, तो काफी दिक्कतें आती हैं और लकड़ी भी भीग जाती है। दाह संस्कार में भारी दिक्कत होती है। लोग भीगते हुए घंटों खड़े रहकर परेशान होते हैं।
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